कृतघ्नता – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 पर ये तो बताओ ना, हमने तो संजू को अपने बच्चे की तरह ही पाला पोसा, तुम्ही बताओ कभी मन मे भी उसके प्रति धुरात आयी?फिर उसने हमारे साथ इतना बड़ा विश्वासघात क्यूँ किया?

भागवान, अब छोड़ इस बात को,हमारी परवरिश में ही कोई कमी रह गयी होगी,तभी संजू ने ऐसा किया।मलाल तो बस इतना है,सरोज गर संजू मुझसे बस कह भर ही देता तो ये मकान मैं खुद ही उसे दे देता,आखिर मेरा भाई है वो,बच्चे की तरह पाला उसे।धोखे से हस्त्ताक्षर करा लेना,ये उसे नही करना था।सरोज बस अब इस बात को यही खत्म कर दो।मैं किराये पर मकान ढूंढता हूँ, वही रह लेंगे।

मुरारीलाल जी पत्नी बिमला ने बिस्तर जो पकड़ा,उससे वह उठ ही ना सकी, बस मन को यह तसल्ली थी कि बेटा बृजभूषण कुछ बड़ा हो गया था,स्कूल जाने लगा था।बिमला तो स्वर्ग सिधार गयी तो बृजभूषण के लालन पालन का दायित्व मुरारी लाल जी पर आ गया। कुछ समय तक तो उन्होंने बृजभूषण का पूरा ध्यान रखा,फिर अपने कामकाज के कारण दिक्कत आने लगी।रिश्तेदारों की सलाह पर उन्होंने दूसरी शादी कर ली।दूसरी पत्नी कृष्णा बहुत ही सरल स्वभाव की निकली।

उसने बृजभूषण को बिल्कुल भी माँ की कमी महसूस नही होने दी।संयोगवश कृष्णा को अपनी स्वयं की संतान का सुख वर्षों तक नही मिला, उसका लाभ ये हुआ कि कृष्णा की पूरी ममता बृजभूषण को ही मिली।बृजभूषण भी कृष्णा को ही माँ मानने लगा था।11 वर्षो के अंतराल के बाद अचानक पता चला कि कृष्णा माँ बनने वाली है।अजीब सी खुशी और शर्मिंदगी ने कृष्णा को घेर लिया था,इस उम्र में बच्चा पैदा करना संकोच पैदा कर रहा था।बड़ी उम्र में बच्चा होने के कारण डिलीवरी ऑपरेशन से तो हुई ही पर कृष्णा भी चल बसी।

नवजात शिशु की जिम्मेदारी मुरारीलाल पर आ गयी,पर अब उसके साथ युवा बृजभूषण के दो हाथ भी थे।बृजभूषण ने संजू की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली।समय के साथ बृजभूषण की शादी सरोज से हो गयी और दोनो ने मिलकर संजू को अपने बेटे की तरह की पाला पोसा।अब तो सब कामकाज भी बृजभूषण ने ही संभाल लिया था ,संजू को बढ़िया स्कूल में दाखिला करा दिया गया था।

इधर संजू के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा था,वह अपनी भाभी से भी ठीक प्रकार से बात नही कर रहा था।उसके व्यवहार से वे दुखी तो थे,पर उसके लड़कपन को मानते हुए उसके व्यवहार को नजरअंदाज करते रहे।

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असल मे संजू के मन में उसके मित्र ने यह भर दिया कि बृजभूषण तो सौतेला है कामकाज और घर सब पर उसका ही तो कब्जा है, उसका क्या है?यह बात संजू के मन मे बैठ गयी और एक दिन बृजभूषण की अनुपस्थिति में संजू अपनी भाभी सरोज को रजिस्ट्री ऑफिस ले जाकर घर अपने नाम करा लिया।घर बृजभूषण ने ही बनवाकर अपनी पत्नी के नाम कराया हुआ था।

इस प्रकार संजू के धोखे ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया।पर उन्होंने अपने मुँह से एक शब्द भी संजू के सामने नही कहा।एक मकान दूसरे मोहल्ले में किराये पर ले लिया और चुपचाप अपने घर से चले गये।कुछ ने रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी,पर बृजभूषण ने कोई भी कार्यवाही करने से इनकार कर दिया।

इस प्रकार चुपचाप भाई के घर छोड़ देने से संजू को झटका सा लगा।पर वह पिता समान भाई    का गला काट धोखा देकर कैसे सामने आता।अकेले घर मे रहना उसे रास नही आ रहा था,हर पल उसे माँ रूपी भाभी की याद आती पर तीर कमान से निकल चुका था।उस दिन सुबह उससे उठा ही नही गया,

पूरा शरीर दर्द कर रहा था।किसी प्रकार डॉक्टर से संपर्क किया,उसने टेस्ट करा कर टाइफाइड बताया तथा पूरे आराम की सलाह दी।अब अकेले रहने की आदत तो थी नही और भाई के पास किस मुँह से जाये, सो अकेले बीमारी की अवस्था मे ही घर मे पड़ा रहा।

अगले दिन जैसे ही सरोज को संजू की बीमारी का पता चला तो वह सब बात भूल बावली सी संजू के पास दौड़ी चली आयी।आकर संजू से चिपट गयी।संजू मेरा बेटा।संजू की आंखों से आंसू थमने का नाम नही ले रहे थे।सरोज एक सप्ताह तक संजू के ठीक हो जाने तक उसके पास ही रही।

इस बीच बृजभूषण नही आया।लेकिन उसने सरोज को भी नही रोका।एक सप्ताह बाद संजू के पास से सरोज चलने को हुई तो संजू ने सरोज के पावँ पकड़ लिये, माँ मत जा, मुझे माफ कर दो।

बृजभूषण संजू को भी अपने लिये गये किराये के घर मे ही ले आया।उस घर को उसने स्वीकार नही किया,संजू को जरूर उसने गले से लगा लिया।

बालेश्वर गुप्ता, नोयडा

मौलिक एवं अप्रकाशित

*गला काटना* मुहावरे पर आधारित कहानी:

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