रम्या एक किस्मतवाली लड़की है।दसवीं पास करते ही उसकी शादी हो गई थी,परन्तु ससुरालवाले और पति की सहायता से वह आज इस मकाम पर पहुँची है।रम्या को आज भी गुजरे हुए दिन याद हैं।
रम्या एक छोटे से गाँव में अपने माता-पिता और चार भाई-बहनों के साथ रहती थी।उसका रंग जरुर साँवला था,परन्तु उसकी बड़ी-बड़ी बोलती आँखें,मासूम चेहरा,घने काले लम्बे केश उसके रुप में चार चाँद लगाते।दसवीं की परीक्षा के बाद रम्या प्रायः सहेलियों के साथ गाँव में नदी किनारे घूमने चली जाती थी। गाँव का हरियाली भरा सुरम्य वातावरण और सहेलियों के साथ के कारण उसे वक्त का पता ही नहीं चलता।
जब घर लौटने को आतुर पक्षियों की चहचहाहट, अस्तलगामी सूर्य को देखती,तो बरबस उसे घर की याद आ जाती।शाम के समय सूर्य की सुरमई किरणों से रमिया के साँवले-सलोने चेहरे की आभा और प्रदीप्त हो उठती।रमिया दौड़कर घर पहुँचती।उसे हांफते हुए देखकर उसकी माँ दुलार भरी फटकार लगाते हुए कहती -“रम्या! तुम इतनी बड़ी हो गई, लेकिन तुम्हारा बचपना अभी तक नहीं गया है!”
रम्या झट से पिता के गले में झूल जाती।उसकी माँ पिता-पुत्री के प्यार-मनुहार को स्नेहभरी दृष्टि से देखती।
रमिया के पिता की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी और गाँव में आगे पढ़ने की व्यवस्था भी नहीं थी।गाँव के अनुसार उसकी इतनी ही शिक्षा काफी थी।रम्या के माता-पिता उसकी शादी के लिए चिन्तित रहने लगें,क्योंकि उनके समाज में कम उम्र में लड़कियों की शादी आम बात थी।
संयोगवश रम्या के लिए एक पुलिस में नौकरी करनेवाले लड़के का रिश्ता आया।लड़का रम्या से दस साल बड़ा थी,परन्तु सरकारी नौकरी के लोभ में उसके पिता ने उससे रम्या की शादी करवा दी।ग्रामीण परिवेश के कारण रम्या के दिल में न तो ऊँचे ख्वाब थे,न ही कोई बड़े सपने।रमिया दुल्हन बनकर ससुराल शहर में आ गई।
सास-ससुर और पति के प्यार के साथ ससुराल में उसका मन रमने लगा।राम्या को पति रमण में कभी अभिभावक की झलक मिलती,कभी प्रेम -रस से सराबोर पति की।सास-ससुर भी बड़े प्यार से उसका ख्याल रखते।उसका पति रमण कभी-कभी राम्या के कमसिन और मासूम चेहरे को देखकर आत्मग्लानि से भर जाता।उसे महसूस होता कि इतनी कम उम्र की राम्या से शादी करके उसने कोई गुनाह किया है।
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रमण था तो पुलिसकर्मी,परन्तु वह राम्या के प्रति बहुत ही संवेदनशील और सहृदय था।राम्या ससुरालवालों का प्यार पाकर खुद को किस्मतवाली समझती थी,परन्तु कभी-कभार पढ़ाई छूट जाने के कारण उसके मन में टीस अवश्य उठती थी,जिन्हें वह मन में ही दबा लेती थी।
देखते-देखते राम्या की शादी के तीन वर्ष बीत चुके थे।इस बीच राम्या ने एक बच्चे को भी जन्म दिया,परन्तु कम उम्र के कारण उसका मातृत्व अधूरा ही रह गया।अब अचानक से राम्या की हँसती-खेलती जिन्दगी में मायूसी छा गई। उसका जीवन नीरस और उदास हो गया।उसके सास-ससुर उसके दुख से मर्माहत थे।राम्या के चेहरे पर मौन,अव्यक्त पीड़ा को देखकर रमण भी दुखित था ।वह हमेशा राम्या को खुश रखने की कोशिश करता।सास-ससुर और पति का प्यार पाकर धीरे-धीरे राम्या अपने गम भूलने की कोशिश करने लगी।
कुछ दिनों में 15 अगस्त आनेवाला था,इस कारण रमण रोज परेड रिहर्सल में जाता था।रमण के रिहर्सल पर जाते समय राम्या खुद अपने हाथों से रमण को वर्दी देती थी।वर्दी देते समय राम्या बड़े प्यार से एक-दो बार वर्दी को गले से लगाकर सहला देती।रमण वर्दी के प्रति राम्या का प्रेम देखकर मन-ही-मन अभिभूत हो उठता।ग्रामीण पृष्ठभूमि होने के कारण भोली-भाली राम्या को बाहरी दुनियाँ की बहुत कम जानकारी थी।शहर में आकर अपनी जिज्ञासु प्रवृति के कारण पति से प्रत्येक चीजों के बारे में पूछती।रमण भी बड़े प्यार से उसके मासूम सवालों के जबाव देता।
अपनी जिज्ञासावश राम्या ने पति से 15 अगस्त की परेड देखने की इच्छा बताई। पति रमण इसके लिए सहर्ष तैयार हो गया।15अगस्त का समारोह देखना राम्या के लिए अद्भुत क्षण था।समारोह में बड़े-बड़े लोगों का शामिल होना,स्वतंत्रता सेनानियों को सलामी देना,तिरंगा फहराने के बाद खड़े होकर राष्ट्रगान होना इत्यादि दृश्य राम्या के रोम-रोम में रोमांच और सिहरन पैदा कर रहे थे।उसे एहसास हो रहा था कि अबतक उसकी जिन्दगी कुएँ के मेंढ़क के समान थी।यहाँ आकर उसे जिन्दगी के नए रूप के दर्शन हुए। मन में ढेरों जिज्ञासा लिए हुए राम्या पति के साथ घर लौट रही थी।रास्ते में उसने पति से पूछा-“रमण!कम उम्र की महिला,जो पुलिस ड्रेस में थी,उसे बड़ी उम्र के पुरुष भी क्यों सलामी देकर रहे थे?”
रमण -“राम्या!वह महिला पुलिस की बहुत बड़ी अधिकारी(आई.पी.एस)थी,इसी कारण सभी उसे सलामी देकर रहें थे।”
पति की बात सुनकर अचानक से राम्या के दिल में पढ़ने की जीजीवषा जाग उठी।उसने पति से कहा -” रमण!एक दिन मैं भी आई.पी.एस अधिकारी बनूँगी!”
पति रमण ने उसका माखौल उड़ाने की बजाय समझाते हुए कहा -“राम्या!तुम केवल दसवीं पास हो,इसके लिए तुम्हें बहुत पढ़ाई करनी पड़ेगी।सबसे पहले तुम्हें ग्रेजुएशन तक पढ़ाई करनी पड़ेगी।उसके बाद ही तुम यूपीएससी की परीक्षा दे सकती हो।”
राम्या ने आँखों में चमक लाते हुए कहा -” रमण!मैं खूब पढ़ूँगी,खूब पढ़ूँगी।तुम साथ तो दोगे न!”
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रमण ने सहमति में सिर हिलाया।राम्या के सास-ससुर उसकी इच्छा जानकार उसे सहयोग करने को राजी हो गए। राम्या खुद को किस्मतवाली मानती थी,जिसे ऐसा ससुरालवाले मिले थे।
अब राम्या की जिन्दगी का मकसद बदल चुका था।जिन इच्छाओं को वह समझ रही थी कि सदा के लिए मर चुकीं हैं,उन इच्छाओं के जाग्रत होने पर उसका जीवन ही बदल गया।उसकी आँखें अर्जुन की भाँति अपने लक्ष्य पर केन्द्रित हो गईं।अपने जुनून से चार साल में राम्या ने ग्रेजुएशन कर लिया।उसके बाद उसने सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरु कर दी।उसका पति रमण जानता था कि इसकी तैयारी के लिए राम्या को बड़े शहर में कोचिंग लेनी पड़ेगी।
राम्या समझ रही थी कि पति की कमाई इतनी अधिक नहीं है कि घर का और कोचिंग का ख़र्च उठा सके,इस कारण वह कोचिंग के लिए चेन्नई जाने में आना-कानी करने लगी,परन्तु रमण राम्या के सपने पूरा करने के लिए दृढ़संकल्प था।पत्नी की पढ़ाई के प्रति इतना सजग पति किस्मतवाली को ही मिलता है।रमण ने राम्या को कोचिंग के लिए चेन्नई जाने को समझाते हुए कहा -” राम्या! समझदारी और आपसी सामंजस्य से विषम परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है!”
राम्या खुशी से पति के गले लग जाती है और पूछती है-“रमण!पैसे कहाँ से लोगे और मुझपर कभी शक तो नहीं करोगे?”
रमण उसे प्यार से समझाते हुए कहता है-” राम्या!पैसों की चिन्ता मुझपर छोड़ दो।मुझे तुम पर पूरा विश्वास है ।विवाह जैसी संस्था की जड़ें इतनी कमजोर नहीं हैं कि छोटी-छोटी बातों से उसकी नींव हिल जाएँ।रिश्तों को सींचने के लिए संवेदनशीलता और भरोसा काफी है।तुम बस मन लगाकर अपनी तैयारी करना।”
राम्या खुशी से पति की बाँहों में सिमट जाती है।
अगले दिन राम्या आँखों में उम्मीदों के सपने लिए चेन्नई पहुँच गई। वह कामिनी नामक लड़की के साथ एक कमरे में रहने लगी ।दोनों साथ कोचिंग क्लास जातीं और साथ-साथ परीक्षा की तैयारी करतीं।उसकी दोस्त कामिनी में आधुनिकता और शालीनता का अद्भुत संगम था।वह बहुत ही स्मार्ट और पढ़ने में होशियार थी।
राम्या को कामिनी से बहुत कुछ सीखने और समझने का मौका मिलता।राम्या कभी-कभी जब अपनी तैयारी से निराश हो जाती,तब कामिनी उसे समझाते हुए कहती -: राम्या!हताशा या निराशा से कुछ नहीं मिलता है।यूपीएससी की सफलता सिर्फ जुनून और कड़ी मेहनत से हासिल की जा सकती है।तुममें मेधा की कोई कमी नहीं है,बस उसे निखारने की जरूरत है!”
कामिनी की बातों से राम्या के मन में नई ऊर्जा का संचार होता और वह जी-जान से तैयारी में जुट जाती।प्रथम प्रयास में राम्या और कामिनी को असफलता हाथ लगी।राम्या तो निराश हो गई, परन्तु कामिनी ने उसका उत्साहवर्धन करते हुए कहा -“राम्या!निराशा की कोई बात नहीं है।हम पिछली गलतियों से सबक लेंगे।”
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कामिनी तो संपन्न घराने की थी,इस कारण उसे पैसों की चिन्ता नहीं थी,परन्तु राम्या अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान थी।उसका पति रमण बीच-बीच में आकर उसे हिम्मत न हारने का हौसला देता।राम्या का दिल पति के प्रति श्रद्धा भाव से नत हो जाता।मन-ही-मन अपने भाग्य पर उसे रश्क होता।
परीक्षा के दूसरे प्रयास में उसकी दोस्त कामिनी को सफलता मिल गई, परन्तु राम्या इस बार भी असफल रही।उसकी दोस्त कामिनी ने जाते- जाते उसे कहा -“राम्या! बहुत कठिन परीक्षा है,परन्तु मुझे विश्वास है कि अगली बार तुम्हें अवश्य सफलता मिलेगी।हिम्मत मत हारना।तुमने सुना ही होगा कि हौसलों से ही उड़ान होती है,पंखों से नहीं!”
कामिनी की बातों से राम्या की बुझी आँखों में चमक वापस आ गई। राम्या पिछली असफलताओं से सबक लेते हुए दुगुने उत्हुसाह से परीक्षा की तैयारी करने लगी,परन्तु तीसरी बार भी उसे असफलता ही हाथ लगी।तीसरी असफलता से राम्या और उसके पति तथा परिवार काफी निराश हो गए। उसके मनोभावों को महसूस करते हुए पति रमण ने कहा-“राम्या! अब परीक्षा की तैयारी छोड़कर घर वापस आ जाओ।”
तीन बार की असफलता से राम्या निराश अवश्य थी,परन्तु पढ़ाई के प्रति उसका जुनून कम नहीं हुआ था।उसका जज्बा अभी भी कायम था।उसने पति से कहा -” रमण! मैं बस एक आखिरी बार प्रयास करना चाहती हूँ,फिर घर वापस आ जाऊँगी।”
रमण ने कहा -“राम्या!ठीक है।जैसी तुम्हारी मर्जी।”
चौथी बार राम्या ने अपनी गलतियों पर बारीकियों से ध्यान देना शुरू किया।कहाँ-कहाँ उससे चूक हुई, इसपर उसने गहरा मंथन किया।चौथे प्रयास में वह कोई कमी नहीं रहने देना चाहती थी।चौथी बार परीक्षा के बाद वह पूर्णतः संतुष्ट थी।रिजल्ट आने से एक दिन पूर्व उसके दिल में हलचल मची हुई थी।आधी रात बीत चुकी थी।नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी।बादलों को चीरकर आती हुई ठंढ़ी हवा के झोंके ने कब उसकी पलकें बंद कर दी,उसे कुछ पता नहीं चला।
अगले दिन चिड़ियों की चहचहाहट और सुनहली स्वर्ण किरणों के साथ सूरज का उदय हुआ। उस सुहानी सुबह राम्या की भी मेहनत रंग लाई। इस बार उसने सफलता प्राप्त कर ली थी।उसे आई.पी.एस.रैंक मिला था।’कौन कहता है कि आसमां में सुराग नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबीयत से उछालो दोस्तों’
राम्या ने इस वाक्य को साबित कर दिया था।राम्या की जिन्दगी में चारों ओर महकते हुए सुर्ख गुलाब खिल गए थे,जिन्हें वह अपनी काबिलियत से दुनियाँ के सामने बिखेर देना चाहती थी।उसने अपने सपनों को हकीकत की धरती पर उतरकर समाज में उदाहरण पेश किया।उसके पति ने खुश होते हुए कहा -“राम्या!तुम्हारी जैसी काबिल पत्नी को पाकर मैं खुद को किस्मत वाला समझता हूँ।”
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राम्या ने भी भावविह्वल होते हुए कहा -” रमण!मैं भी तुम्हारे जैसा पति और परिवार पाकर किस्मतवाली समझती हूँ,वर्ना कौन पत्नी और बहू के लिए इतना त्याग करता है?”
राम्या की आँखों से खुशी के आँसू लगातार बह रहे थे।उसकी दिशाहीन जिन्दगी को एक नई दिशा मिल गई ,मानो सागर ने नदी को आत्मसात कर लिया हो।कच्ची उम्र के सींचे पौधों में नई कोंपलें निकल गईं।राम्या ने सिद्ध कर दिया कि अगर मन में जुनून हो ,तो कोई भी काम असंभव नहीं है।
समाप्त।
उपरोक्त कहानी सच्ची घटना से प्रेरित है।
लेखिका-डाॅक्टर संजु झा(स्वरचित)