Post View 2,116 “अरे चन्दू, ये कैसी बहुरिया लाया है रे तेरा बेटा अपने वास्ते! ये तो अपने माथे पर काली बिंदी लगाए घूमती है| जब से हवेली में कदम रखा है इसने, मैंने तो कभी इसे नई नवेली सुहागिन जैसी लाल बिंदी लगाते नहीं देखा| तुझे न पता क्या, काली बिंदी को तो वशीकरण … Continue reading काली बिंदी – मनप्रीत मखीजा
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