जीने का सहारा – प्रीती वर्मा

रीना!बिटिया ये मेरे मोबाइल में जरा वो बना देना जरा!क्या बोलते हैं,,,,, फेसबुक!

फेसबुक आईडी??मैने कहा!

हां हां !उन्होंने सर हिलाते हुए कहा!

और फोन मेरे तरफ बढ़ाने लगीं!

अरे वाह काकी!आपने तो नया वो भी स्मार्ट फोन ले लिया!आपको इसकी क्या जरूरत?और फेसबुक पर आपको क्या काम?इस उमर में नया चश्का लगा है!मैने काकी की चुटकी लेते हुए कहा!

बस तू बना दे बेटा फेसबुक!काकी ने फिर कहा!

मैने फोन लिया और उनके फोन में फेसबुक पर आईडी बनाने लगी!साथ ही साथ अपनी नजरें चुराती हुई मैं उन्हे देखने लगी!और सोचने लगी,,,काकी सठिया गई हैं!

काकी मेरे बगल में बैठ गई!

मैने फिर पूछा, काकी अगम भैया(काकी के बेटे) तो आपको कीपैड वाला फोन दे गए थे!उसका क्या हुआ?क्या उन्होंने ये आपको भिजवाया है!

नही बेटा!मैने अपनी पेंशन को जोड़ जोड़कर ये लिया है!

हे भगवान!स्मार्ट फोन का इतना बड़ा चश्का कि पेंशन के पैसों से खरीद लिया!इस उमर में!मैने मन ही मन सोचा!

बेटा, फेसबुक पर मेरा असली नाम न लिखना!काकी ने कहा!

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मैने चौंकते हुए अपनी नजरें उठाई,और मेरे मुंह से निकला क्यों??

उन्होंने बस वही सीधा सा जवाब दे दिया!बस तू मेरा नाम न लिखना!और हां मेरी फोटो भी मत लगाना!

अब तो मेरे मन की उत्सुकता और भी बढ़ती जा रही थी!

उन्होंने फिर कहा,,बेटा इसे चलाते कैसे हैं!मुझे सिखा भी देना!

मैं मन ही मन मुस्कुरा भी रही थी!

मैने उन्हे एफबी चलाना सिखा भी दिया!

जैसे जैसे वो सीखती जा रही थी उनके चेहरे पर खुशी की चमक बढ़ती जा रही थी!

रीना बेटा पापा बुला रहे हैं!वहां क्या कर रही है! मां ने मुझे पुकारा!और मैं काकी का फोन देकर चली गई!

दूसरे दिन सुबह मैं अपने छत पर गई तो मेरी नजर काकी पर गई!जो अपने छत पर बैठी फोन में जाने क्या देख देख कर मुस्कुरा रही थी!

उस दिन की मेरी उत्सुकता अधूरी रह गई थी!जो आज और बढ़ गई!

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मैं झट से नीचे उतरी!और काकी के छत पर पहुंच गई!मैं काकी के पीछे से झांकने लगी तो मैने देखा काकी फेसबुक पर अपने छः साल के पोते का वीडियो देख देख कर काफी खुश हो रही थी!जैसे कोई खजाना उनके हाथ लगा हो!

वो विडियो उनके बेटे के एफबी पर शेयर की गई थी!जिसे काकी देख रही थी!

अचानक उनकी नजर मुझ पर गई!अरे रीना तू!बैठ ये देख मेरे पोते की मस्ती!उन्होंने खिलखिलाते हुए कहा!

मैं बैठ गई!

तेरा बहुत बहुत आभार बेटा!तूने मुझे फेसबुक चलाना सिखाया!जिससे मेरे उदास जीवन में खुशियों की रौनक आ गई!ये फोन ये फेसबुक मेरे जीने का सहारा बन गया!कितने दिनों से मैने अपने बेटे बहु और पोते को नही देख पाई थी!चीकू जब यहां से गया था,तो आठ महीने का था!अब कितना बड़ा हो गया!

काकी ने आंखो में आंसू और होंठो पर मुस्कान बिखेरते हुए कहा!

उनकी बातें सुन मेरी भी आंखे सजल हो गई!मैने कुछ और ही सोच लिया था उनके बारे में!फिर मैं सोचने लगी जीवन के अंतिम पड़ाव पर मां बाप को क्या चाहिए, बस अपने परिवार का साथ! अपने पोते पोती को गोद में लेकर उनके साथ खेलना और उन्हें अपने हाथो से खिलाना!

लोग अपने तरक्की के लिए दूसरे शहरों में जाकर बस जाते हैं!बूढ़े मां बाप की सुध भी नही लेते!

पोते के प्यार को तरसती काकी ने अपनी पहचान छुपाकर सोशल मीडिया के जरिए अपने परिवार से जुड़ गईं थी!अपने पोते को देख पा रही थी!अपने करीब महसूस कर रही थी!

शुक्रिया सोशल मीडिया!तुमने मेरे पोते से मुझे मिलवाया!कहते हुए काकी अपना फोन देखने लगीं!

#सहारा 

स्वरचित मौलिक

प्रीती वर्मा

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