लो ऐ साड़ी तुम रख लो शालू, तुम्हारे ऊपर बहुत अच्छी लगेगी पूरे सात हजार की है ।तुम तो इतनी महंगी साड़ी खरीद नहीं पाओगी कभी शालू की जेठानी ने शालू से कहा । शालू बार बार मना कर रही थी नहीं भाभी मैं
नहीं लूंगी ये साडी ।अरे सिर्फ दो ही बार पहनी है अब मेरे किसी काम की नहीं है ।और उस साड़ी के साथ तीन चार और साड़ी भी जिठानी शालू को दे रही थी । शालू को अंदर ही अंदर बहुत बुरा लग रहा थाऔर वो बार-
बार मना कर रही थी कि नहीं भाभी मुझे नहीं चाहिए।
शालू और किरण देवरानी जेठानी थी ।किरण को अपने रूपये पैसे का बड़ा गुरूर था।और शालू के पास इतना नहीं था फिर भी वो बहुत सलीके से रहती थी । इसलिए जब देखो तब शालू को अपना रूतबा
दिखाती रहती थी । जेठानी सोना चांदी भी खूब खरीदती रहती थी तो हर समय शालू को बोलती तुम लोग कैसे रह लेती हो बिना सोने की चूडी हाथ में डाले ,भी मैं तो नहीं रह सकती बिना सोने की चूड़ी पहने सिर्फ कांच की
चूड़ियां पहन कर तो मुझसे नहीं रहा जाता बड़ा खराब लगता है।अब बताओ जिसके पास न हो तो वो क्या चोरी करके लाए ।हर वक्त शालू से सोने चांदी की बात करती आज मैं मंगलसूत्र ख़रीद कर लाई , कभी अंगूठी तो
कभी ईयरिंग कभी कुछ तो कभी कुछ ।बस यही बातें रहती थी उनके पास । कोई भी कान के ईयरिंग और अंगूठी एक हफ्ते से ज्यादा नहीं पहनती थी बदलती रहती थी ।और शालू से बोलती ये भी क्या बात हुई कि एक
अंगूठी पहने ली और एक ईयरिंग कान में डाल ली और सालों की छुट्टी भाई मूझे तो नहीं अच्छा लगता ऐसे।
ऐसे ही एक बार शालू किरण भाभी के साथ कहीं जा रही थी तो शालू के पड़ोस में रहने वाली मेधा रास्ते में मिल गई तो बोलने लगी आंटी आपकी साड़ी बहुत अच्छी लग रही है तो शालू ने कहा धन्यवाद मेधा ,तो
जिठानी तुरन्त बोल पड़ी अरे वो तुम्हारी साड़ी को नहीं बोल रही तुम्हारी साड़ी कहां अच्छी है वो हमारी साड़ी को बोल रही है शालू बोली भाभी वो हमारे पड़ोस में रहती है और आपको तो जानती भी नहीं है आपको क्या
बोलेगी ।तो मुंह बनाकर रह गई । वैसे शालू भी बहुत मंहगी साड़ी नहीं पहनती थी तो क्या जो भी पहनती थी बड़े सलीके से और तरीके से पहनती थी अक्सर लोग बोल देते थे कि साड़ी भी अच्छी है और पहना भी तरीके से
है ।पर जिठानी कैसे सुन सकती है कि कोई शालू की तारीफ कर दे ।
शालू के घर पर आज सत्यनारायण की कथा थी उसमें जिठानी जी आई हुई थी । पूजा के दौरान लाइट चली गई तो सबके बीच में ही जिठानी कहने लगी कि हमारे घर तो जनरेटर है हम लोग तो एक मिनट भी
बिना लाइट के नहीं रहते ।हम तो भी एसी में सोते हैं शालू तुम लोग पता नहीं कैसे इतनी गर्मी में रह लेती हो ।कहीं जाने की बात होगी तो हम तो अपनी गाड़ी से जाएंगे बिना गाड़ी के तो हम कहीं जाते नहीं है ।ये आटों वाटों
से तो हम नहीं जाते कहीं । बिना नौकरों चाकरों के तो हम रहते नहीं है हमारे घर तो सब काम वाली लगी है एक दिन खाना बनाने नहीं आती तो हम तो बाहर होटल जाते हैं खाने बनाते नहीं है । वगैरह वगैरह शालू सोचती हे
भगवान इतना गुरूर अच्छा नहीं होता।
फिर एक दिन शालू के जेठ का हार्ट अटैक से देहांत हो गया ।और जेठानी को आराम तलबी की इतनी लत लग चुकी थी कि कोई काम उनसे होता नहीं था । रोज़ रोज़ बीमार रहना। आराम करके और बाहर
का खाना पीना तबियत से कोल्डड्रिंक और आइसक्रीम खाने की आदत ने उनको शुगर की भयंकर बीमारी दे दी ।जेठ जी के गुजर जाने के बाद वो अकेले घर में रह नहीं सकती बच्चों के पास जाना ही पड़ेगा अब सारी
हेकड़ी धरी रह जाएगी ।तब शालू से कहने लगी कि शालू हमें बच्चों के पास नहीं जाना तुम अपने पास रख लो क्योंकि वो लोग खाने पीने में बहुत रोक लगाती है और मुझसे कोई काम भी नहीं होता।
शालू सोचने लगी कि कौन दिनभर इनकी चिक-चिक सुनेगा ।और हर समय तो मुझे नीचा दिखाती रहती थी अब शालू याद आ रही है उनकी सेवा करने को । शालू के बच्चों ने मना कर दिया कि मम्मी तुम
बिल्कुल भी ताई जी को अपने पास नहीं रखोगी अपने बच्चों के पास रहे जाकर । सही तो है अब क्यों करें शालू बच्चों का फर्ज बनता है वो करें ।
अब जेठानी जी बच्चों के पास रह रही है सब हेकड़ी धरी रह गई रूपया पैसा तो बच्चों में बंट गया और सोना चांदी भी । साड़ियां मंहगी मंहगी सब धरी रह गई और अब याद आ रही है कि शालू को पकड़ा दूं
साड़ियां । जेठानी के बेटे की शादी हुई शालू ने आगे से आगे बढ़चढ़ कर काम किया मदद की थी नहीं याद आई कि देवरानी को एक ढ़ंग की साड़ी दे दे तब तो सौ रूपए की साड़ी पकड़ा दी थी ।और अब जब खुद की
साड़ी पहनी नहीं जा रही है तो शालू को दी जा रही है ।
अब शालू के भी दिन फिर गए हैं बच्चे अच्छी नौकरी में आ गए थे किसी चीज की कमी न थी तो अब क्यों वो ले जेठानी की पुरानी साड़ी । शालू ने तो पक्का मन बना लिया था कि किसी हाल में भाभी जी की साड़ी
नहीं लेनी है ।
देखो शालू इतनी मंहगी साड़ी तुम नहीं लोगी तो आखिर महरी को देनी पड़ेगी मैं तो अब पहन नहीं सकती । नहीं भाभी मुझे नहीं चाहिए आप चाहें किसी को भी दे दो ।किरण भाभी का सारा गुरूर धरा रह गया ।
क्यों करते हैं लोग इतना गुरूर समझ नहीं आता । पता नहीं दूसरों का अपमान करके लोगों को क्या मजा आता है ।
पाठकों आपका भी पाला कभी न कभी ऐसे इंसान से तो पड़ा ही होगा । कैसा अनुभव रहा बताइएगा ।
धन्यवाद
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
17 मई
#गरूर
बहुत सुंदर हृदय को स्पर्श करने वाली कहानी।
Absolutely