Moral Stories in Hindi : आज शर्मा अंकल के विला में घोर सन्नाटा छाया था उनके छोटे बेटे की मृत्यु की खबर से पूरी कॉलोनी में शोक का माहौल था ।शर्मा जी और उनकी पत्नी को सब बहुत भाग्यशाली कहते थे दोनो बेटे आमोद और प्रमोद आईआईटी से पढ़ाई करके अच्छे पैकेज पर अमेरिका और कनाडा में रहते थे ।साल में एक बार जरूर आते थे उन दिनों उनके घर में त्योहार जैसा लगता था ।
शर्माजी के खुशहाल परिवार को देखकर लोगों को जलन होती थी जो स्वाभाविक थी कहते हैं न
“पड़ोसी दुखी क्यों पड़ोसी सुखी क्यों ” परंतु उन दोनो को इस बात से कुछ लेना देना नही था संतुष्ट और सुखी परिवार सकारात्मक विचार रखता था और पढ़ने वाले बच्चों को शर्मा अंकल प्रोत्साहित करते ।इसी गुण के कारण कॉलोनी के सभी लोग उनका आदर सम्मान करते वह सभी के प्यारे शर्मा अंकल हो गए थे ।
आमोद और प्रमोद को समान शिक्षा और संस्कार मिले थे परंतु उनके अंदर भी दूसरे की उन्नति से बाहरी खुशी तो दिखती थी पर अंदर की जलन भी छिपी नहीं थी
आमोद शांत स्वभाव का मेहनती बालक है प्रमोद दिमाग से तेज एवम थोड़ा अभिमानी भी हो गया था उसकी आईआईटी में आमोद से अच्छी रैंक थी उसकी ब्रांच भी आमोद से अच्छी थी इस बात का उसे घमंड था ।
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लेकिन भाग्य को कोई नहीं जानता आमोद को अमेरिका में एक कम्पनी में अच्छे पेकेज की नौकरी मिली और वह अपनी पत्नी के साथ वहा अच्छे से घर में रहने लगा ।
प्रमोद को माइंड ट्री में बंगलौर में अच्छे पेकेज की
नौकरी मिली परन्तु उसे संतोष नही था उसने दो साल में कनाडा में अच्छे पेकेज पर एक मार्केटिंग कंपनी में ज्वाइन कर लिया वह भी एन आर आई बनना चाहता था ।
उसके अंदर आमोद के साथ कंपेरिजन की भावना हो गई थी , कनाडा में उसे पी आर शिप मिल गई थी वह सुख से था परंतु भारतीय करेंसी में दोनो डॉलर के रेट में बहुत अंतर था यह बात भी उसको कचोटती रहती थी ।
प्रमोद के अंदर अपने प्यारे भाई के प्रति जेलसी होती जा रही थी ,वह भूल गया की आमोद ने ही उसको कितना गाइड किया अपनी आई आई टी की पढ़ाई के साथ उसको पढ़ाता था तभी उसकी रैंक उससे अच्छी
आई थी ।
लोगों की निगाह में वह राम लखन की जोड़ी थे ।
आमोद की शादी एक सुंदर एम सी ए लड़की से माता पिता की इच्छा से हो गई उनकी बड़ी बहू सिया भी शांत सुसंस्कृति लड़की है ।
प्रमोद ने अपने साथ की कलीग शिवांगी से शादी की उसने सोचा हम दोनो की आमदनी से घर में खूब ऐश से रहेंगे ।जब तक इंडिया में थे दोनों अच्छी जिंदगी जी रहे थे
शर्मा अंकल आंटी भी बंगलौर जाते आते रहते थे ।
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कनाडा पहुंच कर महंगे किराए में एक छोटा घर लेना पड़ा दोनों अपनी नौकरी में व्यस्त रहते कोई घर के काम एवम खाना बनाने वाली नही । काम को लेकर अक्सर चिक चिक होती , टोरेंटो महंगा शहर ,करोना में शिवांगी की नौकरी भी जाती रही ।
प्रमोद जब भी अमेरिका पेंसिलबेनिया आमोद के घर जाता उसके साथ रहकर उसे कोई खुशी नही होती । उसके अंदर की जलन अब उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन
पैदा कर रही थी अब वह बात बात में शिवांगी पर नाराज होने लगा वह शिवांगी में अपनी भाभी जैसी खूबियों को ढूढने लगा ।
प्रमोद अपने सुखी जीवन को भाई के प्रति जलन के कारण नरक बना रहा था यह बात शर्मा आंटी को महसूस हो रही थी मां बच्चों के हर व्यावहार को अच्छे से समझती है ,वह कहती बेटा सब कुछ बच्चो में एक जैसा नही होता तुम पढ़ाई में इतने अच्छे रहे अपनी कंपनी में भी अच्छा कर रहे हो ।
जलन की भावना इतनी खराब होती है वह आदमी के विवेक को नष्ट कर देती है ,पता नही क्या हुआ एक दिन ऑफिस जाते हुए वह अपनी गाड़ी का संतुलन खो बैठा और उसकी गाड़ी रोड साइड बने पहाड़ से टकरा गई ।
आमोद को खबर मिली वह अमेरिका से आया लेकिन अपने भाई को खो चुका था वह प्यारा भाई जिसे उंगली पकड़ कर आगे चलना सिखाया था ।
सुबह सुबह इस सूचना ने शर्मा अंकल आंटी को
बे मौत मार दिया था । हम सब को याद आ रहे थे कभी बैडमिंटन खेलते कभी बच्चों के साथ क्रिकेट में हाथ आजमा रहे भाईयो की जोड़ी आमोद और प्रमोद ।कभी हरशीज की चाकलेट बाट रहे कभी बच्चों से पोयम सुनते ।विश्वास नहीं होता प्रमोद भैया को हम खो देंगे क्या सच है की वह अब नही मिलेंगे ।
आज कॉलोनी में शर्मा अंकल और आंटी का शुभाग्य दुर्भाग्य में बदल गया पता नही किस की जलन भरी आह लग गई ।
#जलन
पूजा मिश्रा
कानपुर