जान की कीमत – ऋचा उनियाल बोंठियाल
Post View 557 उस दिन भी हमेशा की ही तरह ,मैं शाम की वॉक पर निकली थी। अभी घर से कुछ ही दूर पहुंची थी कि , “चोर–चोर ……पकड़ो–पकड़ो…..” ये शब्द सुन मैं ठिठक गई। “कहीं ये मेरा वहम तो नहीं?” सोचते हुए मैंने ज़रा ध्यान से सुनने की कोशिश की। नहीं ये मेरा वहम … Continue reading जान की कीमत – ऋचा उनियाल बोंठियाल
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