एक थी सरु – बरखा शुक्ला

Post View 6,400 ये कहानी है मेरी मनोरमा मतलब मनो और मेरी सखी सरला याने सरु की । सच कहूँ तो ये सरु की कहानी है ,बस कह मैं रही हूँ ।हम दोनो बचपन की सहेलियाँ और पड़ोसी भी । साथ साथ पढ़ते अब बी .ए . कर रहे थे । ज़ाहिर है साथ ही … Continue reading एक थी सरु – बरखा शुक्ला