व्हाट्सएप ग्रुप में बहन का मैसेज पढ़कर रमा कि आंखों में आंसू आ गए उसे याद आ गई पैंतालिस वर्ष पूर्व की घटना…वो ऑफिस से आई तो उसे पत्र मिला कि उसकी भांजी हुई है..चूंकि उसके परिवार में पहला बच्चा था और वो मासी बन गई थी इसलिए रमा खुशी से झूम उठी उसने उसी समय बाजार से मिठाई मंगवाई और सभी घर वालों को और पड़ोसियों को खिलाई ये बोलकर की मेरी भांजी हुई है। रमा तब कुंवारी थी और अपने नाना नानी के पास रहकर नौकरी कर रही थी।रमा को मिठाई बांटते देखकर उसके नाना जी ने गुस्सा किया,
कि लड़की होने की कौन मिठाई बांटता है?रमा मुस्कुराते हुए बोली -“मुझे किसी से क्या लेना देना मेरी तो पहली भांजी हुई है, मैं तो मिठाई बाटूंगी।” इतना ही नहीं रमा ने दूसरे दिन अपने ऑफिस में भी सहकर्मियों को भांजी होने की खुशी में मिठाई खिलाई।सर्दियों का मौसम था रमा को बुनाई आती नहीं थी ना ही उसके पास समय था सो उसने पड़ोस में रहने वाली एक महिला से जो सिलाई बुनाई का काम करती थी..अपनी भांजी के लिए पैसे देकर स्वेटर मोजे और टोपा बनवाया
और तुरंत बहन को पार्सल कर दिया।रमा अपनी भांजी से बहुत प्यार करती थी..रमा की शादी हो गई किस्मत से उसके दो बेटे हुए पर बेटी नहीं।अब तो रमा अपनी भांजी को ही अपनी बेटी मानने लगी।रमा से जो बनता वो अपनी भांजी के लिए करती..उसके और बहन के हर दुख सुख में साथ खड़ी रहती।वो कभी किसी मुश्किल या दुविधा में होती तो घंटो उससे फोन पर समझाती रहती बगैर ये परवाह किए कि फोन का बिल कितना आ रहा..भांजी रमा के बेटे को राखी भेजती थी।रमा को भांजी की शादी का बहुत चाव था..
वो सोचती थी भांजी की शादी में खूब सजूंगी सवरूंगी और मस्ती करूंगी।भांजी भी उससे कहती..मासी मैं शादी में आपसे डायमंड का सेट लूंगी।रमा ने भी सोच लिया था,कि वो भांजी को डायमंड का सेट देगी क्योंकि ईश्वर की कृपा से उसके पास कोई कमी नहीं थी..भाग्य की विडंबना ऐसी रही, कि भांजी की शादी से पहले रमा के पति का अचानक से देहांत हो गया था वो बेचारी गम में डूबी थी..फिर भी अपनी इकलौती भांजी की शादी में पहुंची।भांजी का बेटा हुआ तो रमा बहुत खुश हुई उसे लगा जैसा उसका ही हुआ है।
रमा ने अपने बेटे की शादी में भी भांजी और उसके पति को बिल्कुल बेटी दामाद जैसा सम्मान दिया था।भांजी के सास ससुर को भी अपने संबंधियों जैसा मान दिया था।भांजी कुछ समय बाद विदेश चली गई।बीच में एक बार इंडिया आई तो वो रमा से ऐसे मिली जैसे बस औपचारिकता पूरी करनी हो..फिर भी रमा उसके साथ बेटी की तरह ही व्यवहार निभाती रही। वार त्योहार पर भांजी फोन कर देती थी और रमा भी जन्मदिन शादी की सालगिरह जैसे अवसर पर भांजी को ही नहीं बल्कि उसके ससुराल वालों को भी फोन करती थी अपने समधी समझकर।
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बीच में भांजी के फोन आना बंद हो गए,रमा फोन करती तो वो उसके जवाब नहीं देती।रमा ने बहन से पूछा तो वो बोली..थोड़ा उसका आजकल मूड ठीक नहीं है घर में प्रॉब्लम्स चल रही हैं..रमा को भांजी की चिंता सताने लगाने लगी तो उसने फिर उसे फोन लगाने की कोशिश की..मगर भांजी ने फोन का जवाब नहीं दिया।बहन भी अपने ससुराल में इतनी व्यस्त हो गई, कि वो कभी कभार ही रमा को फोन करती थी।रमा बेचारी अपना फर्ज समझकर रिश्ते निभाते रही।खुद ही बहन को फोन लगाकर बात कर लेती थी।
रमा का बेटा जो अपनी मौसी से बहुत प्यार करता था वो भी उसे अब यही कहने लगा था..कि जब तक पापा थे मौसी मौसा जी आपको बहुत पूछते थे और उनके बाद ऐसे व्यवहार करने लगे हैं जैसे आप उनके लिए कोई मायने नहीं रखतीं।रमा मुस्कुराकर यही कहती..नहीं रे,तेरी मौसी ऐसी नहीं है..उसका भरा पूरा परिवार है इसलिए उसे समय नहीं मिलता बस यही बात है और कुछ नहीं।उस दिन तो बहन की तरफदारी करके रमा ने बेटे की जुबान बंद करदी लेकिन आज जो गलती उसकी बहन ने की थी, उसका उसके पास कोई जवाब नहीं था।
रमा ने आज जब व्हाट्सएप पर पारिवारिक ग्रुप में बहन का मैसेज पढ़ा,कि हमारी बिटिया को बेटी हुई है तो उसकी आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बह निकली..जिंदगीभर जिस बहन और भांजी को उसने इतनी त्वज्जो दी उन दोनों ने ही उसे एक पल में पराया कर दिया…इतनी बड़ी खुशी फोन करके बताने की जरूरत नहीं समझी…वो अपना दुख किसको बताती?माता पिता और पति रहे नहीं जिनसे वो अपनी तकलीफ कह पाती?बेटा तो पहले ही अपने ऑफिस के कामों में उलझा रहता है उसे कुछ कहकर या बताकर वो और परेशान नहीं करना चाहती थी।
और बहु से अपना दुख साझा करना मतलब अपने ही परिवार का तमाशा बनाना था..अतः अपना दुख अपने में ही समेटे रमा ने मन को शांत किया फिर सोचने लगी, कि अगर बेटे बहु को ये बताएगी, कि मौसी ने व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी नातिन की खबर दी है तो वो लोग और गुस्सा होंगे और बोलेंगे कि आपको भी फोन करके बधाई देने की कोई जरूरत नहीं जैसे उन्होंने बताया है आप भी वैसे ही उन्हें बधाई दे दो।और यदि वो ऐसा करती है तो जो रिश्ते टूटने की कगार पर हैं वो और कमजोर हो जाएंगे…नहीं..नहीं वो ऐसा नहीं होने देगी..क्योंकि जिन रिश्तों को उसने अपने प्यार से सींचा था
उन्हें इस तरह टूटते हुए वो नहीं देख सकती।बस इसलिए रमा ने बेटे बहु से झूठ बोलते हुए कहा -“मौसी का फोन आया था,तुम्हारी भांजी हुई है।”ये सुनकर उसका बेटा खुश होकर बोला..”वाह इतने सालों बाद मेरी भांजी हुई है मैं कल ही दीदी को फोन करूंगा।” रमा ने भी सब कुछ भुलाकर बहन को नानी बनने की बधाई दी।बहन भी चहकते हुए बोली – “तुम्हे भी बधाई हो..तुम भी तो नन्हीं गुड़िया की छोटी नानी हो।
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मैं तुम्हें उसका फोटो भेजूंगी।” रमा तो बेचारी थी ही भोली बहन के बातों से खुश हो गई।बहन से बात होने के दूसरे दिन रमा को भांजी का फोन आया,उसने पहले अपने व्यवहार के लिए रमा से मांगी फिर बोली..वो और बेटी ठीक हैं। जब भी इंडिया आएंगे सबसे पहले आपकी नातिन को आपसे मिलाने लाएंगे..रमा की सारी नाराजगी दूर हो गई उसने भांजी को बधाई और आशीर्वाद दिया।उस दिन के बाद से फिर से पहले की तरह रमा का बहन और भांजी के साथ बातों और फोन का सिलसिला शुरू हो गया।
रमा की एक छोटी सी पहल से टूटते रिश्ते जुड़ने लगे..और परिवार में खुशियां लौट आईं।क्योंकि यदि वो बहन को आगे बड़कर फोन ना करती और उसकी तरह उसे व्हाट्सएप पर बधाई दे देती तो शायद बातों का सिलसिला वहीं खत्म हो जाता और मन में हमेशा के लिए रिश्तों के टूटने की कसक रह जाती।
सच रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए किसी एक को पहल करनी पड़ती है।
और पहल वही करता है जो अपनों से सच्चा प्यार करता है।
कमलेश आहूजा
@स्वरचित मौलिक