एक खामोश सा बंधन – गीतू महाजन

Post Views: 191 भोर का उजाला हो चुका था। रोज़ की तरह अपनी आदत अनुसार कामिनी जी उठी और स्नानादि कर मंदिर की ओर निकल गई। पिछले कई सालों से उनकी यही दिनचर्या थी।सुबह मंदिर से आते हुए गौशाला होते हुए आना।उनकी यह दिनचर्या शायद तब से थी जब से वह ब्याह कर चौधरी खानदान … Continue reading एक खामोश सा बंधन – गीतू महाजन