‘ढलती सांझ और घर के बुजुर्ग एक समान होते हैं’ – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

Post View 1,349 “मां, आज पेरेंट्स टीचर मीटिंग है” “हां, मुझे याद है, चलूंगी, वैसे भी तेरी शिकायतें सुनने से ज्यादा कुछ नहीं होता वहां…तुझे कितना भी समझा लो कि शैतानी मत किया कर, पढ़ाई में मन लगा लेकिन तुझे समझ ही नहीं आता…तैयार हो जाना 9 बजे तक…” वरुण और उसकी मां माधवी जैसे … Continue reading ‘ढलती सांझ और घर के बुजुर्ग एक समान होते हैं’ – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi