धैर्य – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

रीता को गुमसुम बैठी देखकर उसकी भाभी ने पूछा – क्या हुआ रीता यु उदास क्यों बैठी है? हूँ, कुछ सोच रही थी। क्या, राकेश भैया के बारे सोच रही है? भाभी ने पूछा। नहीं, भाभी अब उनके बारे मे सोचने के लिए क्या बचा है। रीता ने कहा।तब किसके बारे मे सोच रही है मम्मी पापा के बारे मे, भाभी ने पुनः अपनी सोच का घोड़ा दौड़ाया। मम्मी पापा का नाम सुनकर उसके पापा जो बगल से गुजर रहे थे रुक गए,

यह जानने के लिए कि दोनों ननद भाभी मे हमारे बारे मे क्या बात हो रही है भाभी अब मम्मी पापा के दुख की क्या चर्चा कि जाय, उनका दुख तो सिर्फ वही समझ सकता है जिसने उनकी तरह अपना जवान बेटा खोया हो। राकेश भैया के जाने का गम घर के हरेक सदस्य को है। मेरे भाई थे तो मुझे दुख होगा ही आपके देवर है तो आप भी उनके गुजरने से दुखी होंगी ही, यह सब तो जाहिर सी  बात है ,

परन्तु मै तो उसके बारे मे सोच रही हूँ जो हमारे घर की भी नहीं है लेकिन शायद राकेश भैया के जाने का खामियाजा उसे भी उठाना पड़ सकता है। यह सुनकर उसकी भाभी ने कहा – आप किसकी बात कर रही है मै समझी नहीं? और किसकी बात करूंगी,मै विभा की बात कर रही हूँ। कितनी अच्छी है, हमें कितनी पसंद है, हमने कितनी ख़ुशी है उन्हें इस घर की बहू बनाने  का फैसला लिया था

और राकेश भैया के साथ उसकी सगाई की थी  यह किसी से छुपी नहीं है, परन्तु सिर्फ राकेश भैया के गुजर जाने से उस पर अपसगुनी  का ठप्पा लग जाएगा और उसकी शादी मे  उसके परिवार वालो  को जाने कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। बिना किसी गलती के उसे सज़ा भोगनी पड़ सकती है यही सोचकर दुखी हूँ। हाँ यह तो है हमारे समाज मे ऐसी लड़कियो की शादी मे बहुत दिक्कत होती है,

परन्तु अब हम इसमें क्या कर सकते है दुखी आवाज के साथ भाभी ने भी उसकी बातो का समर्थन किया। रीता के पापा ने उनकी बाते सुनी और गौर किया कि ये भी लड़कियां है इसलिए उस लड़की का दुख महसूस कर सकती है। मै यह बात नहीं समझ सकता हूँ, परन्तु मुझे उस लड़की के बारे मे कुछ निर्णय जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि मैंने उससे उसे अपने घर की बहू बनाने का वचन दिया है।

सोचते – सोचते वे इस निर्णय पर पहुँचे कि घर कि बहू बनाने का वादा है   तो मुझे राकेश के नहीं रहने पर छोटे बेटे महेश से  उसकी शादी करवा देनी चाहिए। इसप्रकार  वह घर की बहू  बन जाएगी  मेरा वचन भी रह जाएगा और आखिर हमें महेश की भी शादी तो करनी ही है। लड़की पसंद ही है तो कोई दिक्कत भी नहीं होंगी। उन्होंने अपना निर्णय घर मे सभी को सुनाया तो सभी घर वालो ने कहा सही है।

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लड़की वालो को भी दिक्कत नहीं थी क्योंकि बिजनेस मैन परिवार था सभी साथ मे बिजनेस देख रहे थे तो शादी किसी भी बेटे से हो लड़की के उपर फर्क नहीं पड़ना था। राकेश की माँ को यह रिश्ता पसंद नहीं था वह भी यही सोचती थी कि लड़की अपसगुनी है। चुकि घर के सारे निर्णय रीता के पिताजी ही लेते थे और उसे सबको मानना पड़ता था इसलिए वे कुछ कह या कर नहीं पाई,

परन्तु वे अंदर ही अंदर अपनी छोटी बहू से नफ़रत करती थी। वे अपनी छोटी बहू  से बात नहीं करती थी तथा उसे अपना कोई भी काम नहीं करने देती थी। अपने सारे काम अपनी बड़ी बहू से  करवाती थी। इस कारण सारे घर वाले दुखी रहते थे। रीता को ज्यादा ही बुरा लगता था। उसे लगता कि मेरे ही कारण शादी हो गईं, जिससे माँ और भाभी दोनों ही दुखी है। धीरे धीरे समय बीत रहा था

छोटी बहू पूरा प्रयत्न करती कि माँ  के मन मे जो उसके लिए नफ़रत की दीवार ख़डी हो गईं है उसे वह अपनी सेवा के द्वारा खत्म कर सके, परन्तु वे उसे अपनी सेवा का मौका ही नहीं देती थी। छोटी बहू बड़ी ही निष्ठा से घर के और सदस्यों की सेवा सत्कार, प्यार दुलार करती थी परन्तु माँ के नही बात करने के कारण हमेशा उदास रहती थी। घर के सभी सदस्य भी उसे बहुत प्यार करते थे तथा समझाते रहते थे

कि उदास नहीं हो माँ भी एक दिन मान जाएगी और तुम्हे अपना लेगी। कुछ दिनों बाद ही उसे माँ के मन मे जगह बनाने का मौका मिल गया। रीता की शादी तय हो गईं। दोनों बहूओ ने प्लान बनाया कि हमें इस मौका को गवाना नहीं है।सास के किसी भी काम को कहने पर बड़ी बहू कहती माँ मैंने छोटी की शादी मे सारे काम किये,अब थोड़ा छोटी बहू को भी करने दीजिए। आखिर हमें भी तो पता चले

कि हमारी छोटी बहू कितनी काबिल है।अब सास को मन  ना  होते हुए भी काम छोटी छोटी बहू से करवाना पड़ता था, क्योंकि वे रिश्तेदारो के सामने किसी तरह का हंगामा नहीं चाहती थी। धीरे धीरे विवाह का ज्यादातर काम छोटी बहू ने निबटा दिया। जब सास नहीं रहती थी तो बड़ी बहू उसकी मदद कर दिया करती थी, परन्तु सास के आते ही वहाँ से हट जाती थी। सबके सामने छोटी बहू जानबूझकर सास से बात करती।

कभी कहती माँ देख लीजिए  रीता जी के ससुराल भेजनें का सामान सब कुछ सही है। कभी पूछती माँ आज मटकोड़ है तो  खाने मे क्या बनता है। सारे रीत रिवाज़ पूछ पूछ कर करती। रिश्तेदारों के सामने उन्हें बातो का जबाब देना पड़ता था। धीरे धीरे उन्होंने भी बहू से बात करना शुरू कर दिया। शादी बहुत ही अच्छे ढंग से निबट गईं। सारे रिश्तेदारो ने कहा, आप तो बहुत ही भाग्यशाली है बड़ी बहू तो आपकी बहुत अच्छी है ही

आज छोटी बहू ने भी दिखा दिया कि वह भी बड़ी बहू से कम नहीं। आपकी दोनों बहुए  एक से बढ़कर एक है। इसतरह थोड़ा धैर्य, थोड़ा प्यार और थोड़ी सूझबूझ से अपनी सासु माँ के मन मे छोटी बहू ने अपने लिए स्थान बना लिया। शादी खत्म होते होते तक सासु माँ उससे बात करने लगी। उससे अपने काम भी करवाने लगी। दोनों बहुओं ने मिलजुलकर सासु माँ के मन मे उपजे नफ़रत की दीवार को गिरा दिया।

 

लतिका पल्लवी 

विषय – नफ़रत की दीवार

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