बेटे की मर्यादा निभाए मातृभक्त कहलाए,, पत्नी के प्रति मर्यादा निभाए जोरू का गुलाम हो जाए.. गलत कौन?? – नीतिका गुप्ता

 क्या हुआ… इतनी रात में कमरे में क्यों टहल रही हो??

यार मुझे ना गुलाब जामुन खाने की क्रेविंग हो रही है लेकिन फ्रिज में है ही नहीं…

ऐसे कैसे तुमने ठीक से नहीं देखा होगा,, आज ही तो दोपहर में मैंने आधा किलो का डब्बा ला कर रखा है.. चलो मैं तुम्हें देता हूं।

सिया रोहन का हाथ पकड़कर रसोई में आई रोहन ने फ्रिज में गुलाब जामुन का डब्बा ढूंढना शुरू किया।

कहां रख दिया मम्मी ने..?? मैंने उनसे कहा था सिया को दो-तीन दिनों से गुलाब जामुन खाने हैं उसके लिए लाया हूं। अच्छा ऐसा करो अभी तुम आइसक्रीम से काम चलाओ मैं कल तुम्हारे लिए फिर से ले आऊंगा।

लेकिन आइसक्रीम भी नहीं है मैंने सब ढूंढ लिया…

अब रोहन के घनघोर चौंकने की बारी थी क्योंकि कल ही उसने फैमिली पैक का पूरा टब लाकर फ्रीजर में रखा था।

क्या है ना सिया का पांचवा महीना चल रहा है और अचानक से ही उसका स्वाद बदल गया है.. जो मिठाई की महक से ही नाक भौं सिकोड़ लेती थी अब उसको आधी आधी रात में कुछ मीठा खाने का मन करता है। वैसे तो ससुराल में सभी लोग मीठा खाने के बहुत शौकीन हैं और सासू मां कुछ न कुछ घर पर बना कर रख लेती थीं लेकिन पिछले कुछ समय से उनका कुछ बनाने का मन नहीं करता। कभी-कभी बाजार से कुछ आ जाता है और सब खा पीकर खत्म कर लेते हैं।

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रोहन ने सिया के लिए खास तौर पर अलग से गुलाब जामुन और आइसक्रीम लाकर रखी थी,, दोनों में से एक भी चीज ना देखकर वह बड़ा परेशान हुआ।



अगले दिन सुबह को…

मम्मी,, मैंने कल दोपहर को जो गुलाब जामुन लाए थे वो कहीं दिख नहीं रहे और ना हीं आइसक्रीम का टब दिख रहा है।

अरे वह तो कल दोपहर को नीलू और बच्चे आए थे ना तो सब खा पीकर खत्म कर दिया।

तो मम्मी आप मुझे बता देती मैंने आपसे कहा था ना सिया को बहुत क्रेविंग होती है मैं उसके लिए और लाकर रख देता। ठीक है मैं आज ही ले आऊंगा आप प्लीज सिया के लिए बचा कर रखना। आधी आधी रात में उठकर खाने को मांगती है..!!

रोहन शाम को आते समय आइसक्रीम और गुलाब जामुन दोनों ही लेकर आया। आइसक्रीम फ्रिज में रख दी और गुलाब जामुन का डब्बा ले जाकर सिया को थमा दिया।

सिया एक के बाद एक चार पांच गुलाब जामुन उठा कर खा गई।

आहा अब शांति मिल रही है.. रोहन तुम्हारे बच्चे ने तो मुझे परेशान करके रख दिया है। जब देखो कुछ ना कुछ खाने को मांगता रहता है और अगर कुछ देर भी भूखी रह जाऊं तो उल्टी आने लगती हैं। सबको खाने की महक से उल्टी आती है और मुझे भूखा रहने पर..

अरे तो तुमको भूखा रहने की क्या जरूरत है..?? जब जो खाने का मन हो मम्मी को कह दिया करो अगर मैं नहीं भी हूं पापा ले आएंगे। वैसे मम्मी गाजर का हलवा बहुत स्वाद बनाती हैं,, मैं आज ही बोलता हूं वह बना कर रख देंगी फिर तुम्हें यह बाहर की मिठाईयां नहीं खानी पड़ेंगी..!!

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रोहन मैंने मम्मी जी से कहा था कि घर पर ही कुछ मेवा के लड्डू या कोई और मिठाई बना दें लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

हां तो कोई बात नहीं… मैं कहता हूं और कल ही सामान भी ला दूंगा।

मम्मी,, सर्दियां शुरू हो गई हैं गाजर का हलवा बना दो ना बहुत मन है खाने का..!! थोड़ा ज्यादा बना लेना सिया भी यह बाहर की मिठाइयों की जगह आपके हाथों से बना पौष्टिक और स्वादिष्ट हलवा खाएगी। बेबी को भी अभी से दादी के हाथों का स्वाद मालूम हो जाएगा।



ठीक है.. बस इतना ही रुखा सा जबाव कमलेश जी ने दिया।

अगले ही दिन हलवा बनकर तैयार हुआ,, वैसे तो सिया को गाजर का हलवा कोई खास पसंद नहीं था बस सर्दियों में एक या दो बार थोड़ा सा खा लिया लेकिन इस बार हलवे की खुशबू उसके मन को महका रही थी। सासू मां के कड़क स्वभाव के कारण उसकी खुद से रसोई में जाकर हलवा लेने की हिम्मत ना हुई।

शाम को खाने की मेज पर सबके लिए हलवे की कटोरियां रखी गईं,,

वाह मम्मी बहुत स्वाद बनाया है… थोड़ा और मिलेगा..

यह कटोरी रखी है इसी में से ले ले..!!

लेकिन मम्मी यह कटोरी तो सिया की है ना,, आप मुझे बता दो मैं रसोई से खुद ले आऊंगा।

रसोई में हलवा नहीं है..

लेकिन मम्मी मैंने तो इतनी सारी गाजर लाई थीं मावा लाया था जिससे आप बनाकर रख दो और सिया खा सके अच्छे से..

हां बनाया है,, आधा हलवा मैंने नीलू दामाद जी और बच्चों के लिए भेज दिया। उन सब को भी मेरे हाथों का स्वाद बहुत पसंद है।

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मम्मी आप मुझे कह देते… मैं और ज्यादा ला देता,, आपको पता है ना सिया को अभी मीठा खाने की बहुत क्रेविंग होती है और बाहर की मिठाइयां उसके लिए ज्यादा ठीक नहीं हैं।

हां तो मत खाए ना मिठाई.. बहुओं को इतना मनमानी करना शोभा नहीं देता,, अपनी “मर्यादा” में रहना चाहिए। तू तो जोरू का गुलाम पहले से ही था… अब बच्चा क्या आने वाला है ऐसा लगता है कि तेरी पत्नी तो स्वर्ग से उतरी अप्सरा है। ना कोई काम करने देता है उसे और तो और मां को भी बीवी की सेवा में लगाना चाहता है। इतना ही हलवा खाने का शौक है तो खुद बनाकर खा ले..!! 



पहली बार अपनी मां का ऐसा रूप देखकर रोहन बहुत ज्यादा हैरान था। सिया का इतना डरा सहमा सा स्वभाव आज उसे समझ में आ रहा था। रोहन को लगा शायद मां किसी बात को लेकर नाराज हैं इसलिए ऐसा बोल गईं।

अगले दो-तीन दिन तक वह अपनी मां से बात करने की वजह समझाने की कोशिश करता रहा लेकिन कमलेश जी तो इस जिद पर अड़ी थी कि वह अपनी बहू की गुलामी नहीं करेंगी क्योंकि वह कोई अनोखा बच्चा पैदा नहीं कर रही। उन्होंने खुद भी बच्चे जने हैं और जो घर में बनता था वही चुपचाप खाया है।

रोहन को परेशान देखकर आखिरकार उसके पिता ने कमलेश जी से बात की…

आज तक तुम मेरी मां को कोसती आई हो क्योंकि बच्चों के समय में उन्होंने तुम्हारा किसी भी तरह से ध्यान ना रखा।

हां तो क्या गलत है इसमें…?? आपकी मां ने मुझे सारी जिंदगी कोल्हू के बैल की तरह बनाकर रखा ना कभी प्यार के दो मीठे बोल बोले ना आपके मेरे रिश्ते को कभी सही से चलने दिया और ना ही मेरी गर्भावस्था के समय में मुझे कोई आराम दिया बल्कि उस समय तो उससे और भी ज्यादा काम कराया। आपको याद है जब मैं तीसरी बार मां बनने वाली थी डॉक्टर ने कहा था कि मुझे अच्छे से अच्छा खाना पीना और ज्यादा से ज्यादा आराम चाहिए वरना मेरे या बच्चे की जान को खतरा हो सकता है लेकिन मुझे ना अच्छा खाना पीना मिला और ना ही आराम जिसकी वजह से जन्म लेने के कुछ देर बाद ही हमारे बच्चे ने दम तोड़ दिया। उसका वजन इतना ज्यादा कम था कि वह इस दुनिया में कुछ पल ही बिता सका। माना कि मेरी सास आपकी जन्म दात्री कि मैंने उनके अंतिम समय तक पूरी सेवा की लेकिन अपने मन से कभी उन्हें माफ ना कर पाई और ना हीं कभी आपको.. अपनी मां के सामने कभी आपको मैं दिखाई ही ना दी।



यही गुस्सा और जलन है ना… तेरे पति ने अपनी मां के सामने कभी तेरा साथ ना दिया तेरा ख्याल ना रखा और आज तेरा बेटा अपनी पत्नी की सुख सुविधा के लिए अपनी मां से लड़ रहा है तो तुझको जोरू का गुलाम लग रहा है। तुझे तो अपनी परवरिश पर नाज होना चाहिए कि तेरा बेटा अपने पिता की तरह लापरवाह और खुदगर्ज नहीं..!!

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सोहन लाल जी के कहे हुए आखिरी शब्द कमलेश जी के दिमाग पर हथौड़े की तरह पड़ रहे थे। सोचने पर मजबूर हो गईं कि कहीं वो जाने अनजाने अपनी सास के ही नक्शे कदम पर तो नहीं चल रहीं।

कमलेश जी के बारे में तो कह नहीं सकती,, वो स्वयं को बदलकर अपनी बहू का ध्यान रखेंगी या अतीत में अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का बदला अपनी बहू से निकालेंगी। आज नहीं लिखना चाहती कि किसी के एक बार समझाने से ही सास बदल गई और अपनी बहू को प्यार और देखभाल करने लगीं। आपसे जरूर जानना चाहती हूं कि अगर आप होते कमलेश जी की जगह तो क्या करतीं…???

सच ही तो है पति मां का लाडला निकला और बेटा जोरू का गुलाम… हममें से बहुत सारी औरतें अपनी पूरी जिंदगी यह समझ ही नहीं पाती है कि उन्हें आखिर चाहिए क्या..??  आखिर किस बात की नाराजगी है..?? पति ने खुद का साथ नहीं दिया तो नाराज हैं पति से और बेटा अपनी पत्नी का साथ दे रहा है तो भी नाराज हैं बेटे से…

शायद आप कहें कि नहीं ऐसा नहीं होता गर्भावस्था में तो सास बहुत ज्यादा ध्यान रखती हैं लेकिन सबके नसीब में ऐसा नहीं होता। खुद के लिए सब कुछ खुद ही करना पड़ता है। 

आने वाली पीढ़ी की सासों के लिए एक सुझाव देना चाहती हूं “अपनी सास और पति का गुस्सा अपने बेटे और बहू पर निकालकर अपना बुढ़ापा खराब मत करना।”

आप की प्रेगनेंसी में आपको कैसा खाने का मन करता था,, मैं अपना बताऊं तो शुरू के 3 महीने सिर्फ खट्टा खट्टा खट्टा और चौथे महीने कुछ समझ नहीं आया,, पांचवें से सातवें महीने बहुत सारा मीठा और खासतौर पर गुलाब जामुन… इत्तेफाक से मेरे बेटे की भी पसंदीदा मिठाई गुलाब जामुन है। आप भी अपने अनुभव शेयर कीजिए हमारे साथ

#मर्यादा

   स्वरचित एवं मौलिक रचना

     (सर्वाधिकार सुरक्षित)

       नीतिका गुप्ता

3 thoughts on “बेटे की मर्यादा निभाए मातृभक्त कहलाए,, पत्नी के प्रति मर्यादा निभाए जोरू का गुलाम हो जाए.. गलत कौन?? – नीतिका गुप्ता”

    • Doctor bhut kuch bolte hai…kya aap wo sb kuch follow karte hai..n shayad apko iska experience na ho.. pregnancy me jb craving hoti hai to kbhi kbhi overeating bhi ho jati hai….

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