बहन नहीं माँ हो – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : अदिति की छोटी बहन मां के गुज़र जाने के बाद से अदिति के पास ही रहने लगी थी।यह अदिति की सास का निर्णय था,ताकि उनकी बहू उसके लिए चिंतित ना होती रहे।छोटी बहन अब सास की अपनी ही बेटी बन गई थी। उन्होंने ही अदिति की प्रिंसिपल से निवेदन करके उसी स्कूल में  के जी में नौकरी भी लगवा दी थी उसकी।

सारे दूर और पास के रिश्तेदार केवल कुछ दिनों के लिए ही रखने को तैयार थे,हमेशा के लिए नहीं।अदिति को उसकी सास ने सच्चाई का सामना करवाया”देखो बहू,जवान‌ लड़की है।कोई क्यों उसे अपने पास रखने को तैयार होगा?तुम तो उसकी बड़ी बहन हो।मां जैसी ही हो।यह जिम्मेदारी तुम्हें ही निभानी पड़ेगी।उनका ममतामई रूप देखकर अदिति नतमस्तक हो गई थी।

ससुराल में बेटे की साली का रहना किसी भी सास को पसंद नहीं आता होगा,पर ये तो मां ही बन गई थी उसकी।मां को खोने का दुख छोटी ने ज्यादा सहा था।उसके हांथों में ही मां ने आखिरी सांस ली थी।स्वभाव से अति नरम और शांत प्रवृत्ति की छोटी कभी भी किसी के लिए खास नहीं थी।

घर के छोटे छोटे सारा काम करती थी पर नाम कभी नहीं होता था उसका।दब्बू हो गई थी वह।यहां आकर स्कूल में नौकरी करने से उसका आत्मविश्वास तो बढ़ा ही था साथ ही घर -गृहस्थी की समझ सास से मिल रही थी उसे।

अदिति एक दिन स्कूल से आई तो सासू मां ने बताया एक रिश्ते के बारे में छोटी के लिए।हमारे घर से आधे घंटे का ही रास्ता था।अदिति अभी आर्थिक दृष्टि से तैयार नहीं थी इस शादी के लिए ,सो टाल रही थी।सास ने फिर छोटी की मां बनकर समझाया”जवान लड़की को कब तक घर पर रखोगी तुम।शादी की उम्र तो हो गई है,देनी तो पड़ेगी।कौन देखेगा लड़का तुम्हारे अलावा।उनकी जिद ने छोटी की शादी तय करवा ही दी।

इस कहानी को भी पढ़ें: 

बहन – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

अब बात आई खर्चों की तो सभी रिश्तेदार पल्ला झाड़ने लगे।कोई भी तैयार नहीं था मदद करने के लिए।अदिति ने तब सास से सलाह कर मायके की जमीन जो दादा की संपत्ति थी,बेचने का निर्णय लिया।दोनों भाई भी एकमत थे क्योंकि उनके पास भी जमा पूंजी थी नहीं।अदिति ने दोनों भाइयों से साफ़ -साफ कह दिया था कि छोटी की शादी में कोई कमी न रखें।बिन मां-बाप की बेटी है।किसी से कुछ नहीं मांगेगी,पर हम भाई -बहनों का फर्ज है यह।

भाइयों और मंझली बहन ने मिलकर खरीददारी की,जमीन बेचने के पैसे से ही।गहने,दहेज ,का इंतजाम भी उसी पैसे से हो गया।एक रिश्तेदार ने पलंग और ड्रेसिंग टेबल देने की बात कही थी।जब वो लेकर आए तभी सामान देखकर उनके विशाल हृदय का पता चल गया।

छोटा भाई बिना कुछ बोले दुकान में उन्हें बदलकर और पैसे देकर देने लायक खरीद लिया।होटल में शादी हो रही थी,लड़के वालों के शहर में ही।शादी में निमंत्रित रिश्तेदार हंसने की तैयारी में आए थे,पर इंतजाम देखकर  दंग से ज्यादा दुखी हो रहे थे। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतने अच्छे से हो पाएगी छोटी की शादी।शादी के वक्त सहानुभूति दिखाते हुए औपचारिक रूप से पूछ रहे थे अदिति की सास से “दीदी,हमें तो कुछ बताया नहीं आपकी बहू ने।

हम अपनी सामर्थ्य के हिसाब से करते ही।इतना ज्यादा तामझाम करने की क्या जरूरत है?होटल में क्यों ,घर से ही हो सकती थी शादी।”सास ने शांत होकर कहा”यह सलाह मैंने ही दी थी उसे।घर से होगी शादी तो सारा भार उस पर ही पड़ता।स्कूल ,घर सब संभालकर इतना बड़ा दायित्व निर्वाह कर रही है।उनके दादा की पैतृक संपत्ति से ही शादी हो रही है,तो खर्च की चिंता क्यों करना।आप सभी इतने दूर से आए हैं।

बेटी को आशीर्वाद दीजिए,अदिति के सर पर अपना हांथ रखिए ,यही बहुत है।आप लोग तो ननिहाल के हैं।आपकी बहन की बेटी की शादी हो रही है।खूब खुशी-खुशी आनंद से शादी देखिए।कुछ  कमी लगे तो मुझे या अदिति को कहिए।आखिर सगे रिश्तेदार हैं आप।मैं तो लड़की की दीदी की सास हूं,सगा रिश्ता तो है नहीं कुछ।”

उनकी बातें सुनकर और निर्विघ्न शादी संपन्न होते ही सारे रिश्तेदार गौं के यार की तरह अगले ही दिन दुबक कर भाग लिए।

शुभ्रा बैनर्जी

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!