‘थैंक्यू भाभी माॅं’ – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 88

अनु, एक पढ़ी-लिखी, सुलझे विचारों वाली खुशमिजाज महिला थी। खुश रहना और दूसरों को खुशियाँ बांटना उसका स्वभाव था। किंतु, आजकल कुछ समय से वह अपने अंदर कुछ उदासी, कुछ खालीपन महसूस कर रही थी। वह चाहकर भी खुश नहीं रह पा रही थी, मन सदा अशांत सा रहता। ऐसा नहीं था कि उसे कोई … Read more

सम्मान-श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

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जितनी तेजी से ट्रेन पटरियों पर दौड़ी जा रही थी उतनी ही तेजी से सपना भी अपने यादों में खोई जा रही थी। आज से दो साल पहले, जब वह हाथों में ट्रॉफी लिए दौड़े-दौड़े घर पहुँची थी- “माँ, पापा, भैया, भाभी कहाँ हो आप सब? देखो मुझे क्या मिला है।” सपना खुशी से चिल्ला … Read more

उड़ान – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 57

मुंबई की ऊॅंची चमकदार बिल्डिंग में रहने वाली नीलिमा की जिंदगी बाहर से एकदम परफेक्ट लगती थी। एक बड़े बिजनेस टाइकून की वाइफ, दो प्यारे-प्यारे बच्चे और लग्जरी लाइफ। लेकिन, अंदर ही अंदर वह अपने अधूरे पड़े सपनों की कसक लेकर जी रही थी। नीलिमा एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर थी। शादी से पहले उसने कई … Read more

मिठास – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

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जैसे ही नीति छत से कपड़े सुखाकर आई उसने देखा कि डाइनिंग टेबल पर रसमलाई का एक बड़ा सा डिब्बा रखा है।रसमलाई के डिब्बे को देखते ही उसकी आंखें चमक उठी।रसमलाई उसकी कमजोरी थी। उसका बस चलता तो अभी डब्बे को खोल रसमलाई पर टूट पड़ती लेकिन नई-नई शादी के संकोच ने उसके हाथ रोक … Read more

झिलमिला उठे खुशियों के दीप – श्वेता अग्रवाल  : Moral Stories in Hindi

New Project 87

“भाइयों और बहनों, आज रात बारह बजे से संपूर्ण देश में संपूर्ण लॉक डाउन होने जा रहा है | आज रात बारह बजे से घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जा रही है |” देश के नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संबोधन के साथ ही पूरे देश में लॉक डाउन … Read more

सिंदूर की आभा – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 87

जानकी जैसे ही सिंदूर खेला खेल कर  आई, राम ने पीछे से उसे पकड़ लिया, जानकी शरमा कर बोली, “ये क्या कर रहे हैं, छोड़िए!” “छोड़ने के लिए थोड़ी पकड़ा है।” राम मुस्कुरा कर बोला।  यह सुनते ही जानकी के चेहरे की सिंदूरी आभा शर्म की लाली से मिलकर और भी सुनहरी हो गई। “प्लीज, … Read more

खुद का संडे – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 95

नीलांश कई दिनों से देख रहा था कि निली काफी उदास और गुमसुम सी होती जा रही है।बस मशीन की तरह अपना काम निपटाती रहती है।ना हँसना न खिलखिलाना। माँ-पापा की चाय, बिट्टू-पिंकी की पढ़ाई, लंच-डिनर, उसका टिफिन, घर की साफ-सफाई सब काम बिल्कुल परफेक्ट, समय पर लेकिन खुद बिल्कुल बुझी-बुझी सी। जब भी नीलांश … Read more

महकते रिश्ते – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 60

रूप और गुण की खान थी नीति, जो भी उससे मिलता उसकी प्रशंसा किये बिना नहीं रह पाता| उसके इन्हीं गुणों पर रीझ कर प्रियांशु ने उसे अपनी जीवन-संगिनी के रूप में चुना था| लेकिन, नीति के यही गुण उसकी सास शीला के गले में फांस की तरह चुभ रहे थे| उनको ये बात बिलकुल … Read more

सिर्फ बहू से बेटी बनने की उम्मीद क्यों? – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 77

सुधा की नजरें बहुत देर से एक माॅं- बेटी की जोड़ी पर टिकी हुई थी। वह उन्हें पहचानने की कोशिश कर रही थी। “माॅं, प्लीज मान जाइए ना। यह लाल रंग की ड्रेस आप पर बहुत अच्छी लगेगी।” “देख बेटा, जिद मत कर। मैंने कह दिया ना मैं इतना ब्राइट कलर नहीं पहनूॅंगी। बिल्कुल बूढी … Read more

अपनों का साथ और आशीर्वाद – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 46

“मैम, मेरी मम्मा आपसे मिलना चाहती हैं।” “हाँ-हाँ मिलवाओ। मैं भी उनसे मिलने के लिए बहुत उत्सुक हूँ।” “अभी तो कोई अर्जेंट काम के कारण उन्हें फंक्शन से जाना पड़ा है लेकिन उन्होंने कहा है कि वह कल कॉलेज में आपसे मिलने आएगी।” “ठीक है। कल 11से 12 बजे तक मैं फ्री हूँ।” “ओके मैम। … Read more

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