भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

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गीता मायके आई थी। उसका चेहरा मुरझाया हुआ था, आँखों में उदासी और चिंता की गहरी लकीरें खिंची हुई थीं। गीता की माँ, जो अपनी बेटी के स्वागत में पूरे मनोयोग से लगी हुई थी, उसकी ऐसी हालत देखकर घबरा गई। “आओ बेटा, बैठो। कैसी हो? घर में सब कैसे हैं?” माँ ने गीता को … Read more

कभी- कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा भी करना पड़ता है – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 43

विमला जी (६० बर्ष) अपने बेटी को बहुत बहुत ज्यादा मानती थी | हर बात पे मेरी बेटी ,मेरी बेटी करती रहती थी | विमला जी के पति राजेश जी, बहुत  समझदार और सुलझे हुए बुद्धि विचार वाले व्यक्ति थे | उन्ही के कारण उनके परिवार में  सब  हसी खुशी चल रहा था | उनका … Read more

किस्मत वाली – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 70

सोनम (४४  बर्ष ) बहुत ही अच्छी महिला थी | वह अपना होटल चलाती  थी | बहुत ही कम दाम में खाना खिलाती थी लोगो को  | और रात को १० बजे होटल बंद करती थी | जो कुछ भी खाने  का सामान बच जाता वो पैक कर के  रख लेती | रास्ते में  जो … Read more

एक हाथ से ताली नहीं बजती – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

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रितु और मीतू दो बहने थी | दोनो की एक ही घर में शादी हुई थी | रितु बहुत खुश रहती थी ,लेकिन मीतू बहुत दुखी  रहती थी |दोनो अपनी मम्मी से मिलने आई थी | मीतू ने बहुत सारी शिकायत अपने सास  की ,अपने मम्मी से  किया | और बोला मम्मी, सास हमको बिल्कुल … Read more

जिस घर में बुज़ुर्ग हंसते मुस्कुराते हुए रहते है | उस घर में भगवान का वास होता है – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 36

दीपा और रवि  की शादी बहुत ही अच्छे से हो गई | दोनों का प्रेम विवाह हुआ था | एक ही कम्पनी में दोनो काम करते थे |रवि के मम्मी पापा , बहू के घर आने से बहुत खुश थे | दीपा सुबह जल्दी उठ जाती और  घर का काम करती | फिर ऑफिस जाती … Read more

बहुरानी – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

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द्दुल्हन बनी बैठी थी सुनीता | बहुत ही सुंदर लग रही थी | सारे रिश्तेदार सुनीता को देखने आते | सब बोलते कमला जी आपकी बहु तो बहुत ही सुंदर है | कमला जी बोलती मेरी बहुरानी को नजर नही लगाओ , और मन ही मन बहुत खुश होती |सारा दिन बहुरानी बहुरानी करती रहती … Read more

अफसोस – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

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मैने अपनी जिंदगी मैं “ना ” कहना नही सीखा था | इसका अफसोस हमको हमेशा होता है | मैने ” ना ” कहा होता तो शायद मेरी जिंदगी आज इस मकाम पे नही होती | मैं अपने परिवार वालो की हर सही ,गलत  बातो को मानती | कभी मना नही किया |इस कारण मेरे परिवार … Read more

एक घुटन भरे रिश्ते से आजादी मिल ही गई – रंजीता पाण्डेय  : Moral Stories in Hindi

New Project 49

आज सुकून मिल रहा है | घुटन नही हो रही है | इतना बड़ा फैसला लेना ,वो भी इस उम्र में | चौहतर, साल की उम्र कैसे निकल गई  ,पता ही नही चला | अब उम्र के आखिरी पड़ाव पे आराम से अपने श्री मान जी के साथ आराम से जीना चाहती हू| अभी भी … Read more

खुशियों का दीप – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 43

भगवान का दिया मेरे पास सब कुछ था | गाड़ी ,घर, बंगला ,एक बहुत प्यार करने वाला पति | सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था | धीरे धीरे महसूस हुआ की हमारी शादी को पांच साल हो गए | हमारे अब तक बच्चे नही थे | जहा कही भी बच्चो को देखती ना चाहते … Read more

मैं नही चाहती ये छोटी सी बात कोई बड़ा रूप ले ले और सब रिश्ते बिखर जाएं – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 48

मेरे पापा ने हम लोगों की परवरिश बहुत ही अच्छे से किया था | उम्र के इस पड़ाव में भी , उनकी एक एक बात याद है | उन्होंने जो संस्कार दिए है हमको,  उसी के बल पे आज मैं अपनी जिंदगी  के बड़े से बड़े दुख भी आसानी से काट लेती हूं |  आज … Read more

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