छाया – मुकुन्द लाल : Moral stories in hindi

New Project 56

   जाड़े की रात थी। चारों ओर अंधेरे का साम्राज्य था। चतुर्दिक नीरवता व्याप्त थी। कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। बर्फ की तरह ठंडी हवा बह रही थी।    रात के दो बजे के आस-पास मेरी नींद टूट गई। कुछ देर तक मैं आंँखें बन्द करके लेटा रहा किन्तु नींद नहीं आई। तरह-तरह की बातें दिमाग … Read more

प्रेम-पुजारी – मुकुन्द लाल : Moral stories in hindi

New Project 58

   पुजारी शंभुनाथ की उम्र जब ढलने लगी तब बुढ़ापा के कारण उनकी शक्ति क्षीण हो गई, घुटनों के दर्द के कारण चलना-फिरना  भी मुश्किल हो गया तो ऐसी परिस्थिति में दैनिक पूजा-पाठ की जिम्मेदारी अपने युवा पुत्र भुवनेश को सौंप दी।    झूलन, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसे व्रतों और अन्य त्योहारों में ही वे आते थे … Read more

किस्मत का करिश्मा – मुकुन्द लाल : Moral stories in hindi

New Project 91

देवांश अपनी शिक्षा-दीक्षा पूरी करने के बाद रोज़ी-रोटी के लिए प्रयत्न करने लगा। लम्बा-चौड़ा सुगठित बदन और मजबूत कद-काठी होने के कारण उसने सिपाही और दरोगा की नौकरी के लिए प्रयास शुरू कर दिया, किन्तु कभी वह फिजीकल में छट जाता तो कभी लिखित परीक्षा में। इस तरह उसकी आकांक्षा पूरी नहीं हो सकी । … Read more

यादें मिट क्यों नहीं जाती? ( भाग-5 ) : Moral stories in hindi

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अनुराग और रश्मि एक दूसरे को चाहते थे लेकिन दोनों में से कोई खुलकर अपनी भावनाओं को प्रकट नहीं कर पा रहे थे। एक दिन हिम्मत करके अनुराग ने अपनी चाहत को उसके सामने रखा। उसके जवाब में रश्मि ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उसके प्रति समर्पण की भावना … Read more

यादें मिट क्यों नहीं जाती? ( भाग-4 ) : Moral stories in hindi

 आपने पढ़ा कि राम नरेश बाबू कोर्ट-कचहरी के चक्कर में हमेशा बाहर ही रहते थे। हवेली की सारी जिम्मेवारी सुमित्रा देवी पर थी। फिर भी व्यस्तता के बावजूद वह यदा-कदा रश्मि की पढ़ाई के संबंध में जानकारी लिया करती थी। अनुराग और रश्मि के बीच नजदीकियांँ बढ़ने लगी थी। दोनों अपने भावी जीवन की रूपरेखा … Read more

यादें मिट क्यों नहीं जाती? ( भाग-3 ) : Moral stories in hindi

आपने पढ़ा कि आपसी विचार-विमर्श और अनुराग की सहमति के बाद वह रश्मि को नियमित पढ़ाने लगा। इस दरम्यान वह रश्मि के सौंदर्य और प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित होकर उसकी ओर आकर्षित होने लगा, फिर भी वह अनहोनी की आशंका के वशीभूत वह अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखता था। अक्सर अनुराग, रश्मि की बड़ी … Read more

यादें मिट क्यों नहीं जाती? ( भाग-2 ) : Moral stories in hindi

आपने पढ़ा कि भूतपूर्व जमींदार के पुत्र राम नरेश बाबू को जब अपनी मित्र-मंडली और चाटुकारों से पता चला कि उनके कस्बे में अनुराग नामक युवक ने बी. एस. सी. किया है, तब उन्होंने अपनी पुत्री  रश्मि को उससे ट्यूशन पढ़वाने का मन बना लिया था क्योंकि शादी की उम्र हो जाने के बाद भी … Read more

यादें मिट क्यों नहीं जाती? ( भाग-1 ) : Moral stories in hindi

   उसके लिए घर-गृहस्थी की गाड़ी खीचना विवशता थी। मांँ-बाप ने जिसके साथ विवाह कर दिया था, उससे पिंड छुड़ाना उसके वश की बात नहीं थी। चाहकर भी वह ऐसा नहीं कर सका था।   पति-पत्नी में बर्फ का ठंडापन और हारे हुए खिलाड़ी की उत्साहहीनता व्याप्त थी।   कभी-कभी उसकी इच्छा होती थी कि घर का त्याग … Read more

आत्मग्लानि की आंँच – मुकुन्द लाल  : Moral Stories in Hindi

New Project 87

Moral Stories in Hindi : – एक बाजारनुमा कस्बे में दो भाई अमरेश और मंजीत रहते थे। दोनों भाइयों का संयुक्त परिवार था। बड़ा भाई अमरेश को कपड़े की दुकान थी जबकि छोटा भाई आटा-तेल के मिल में नौकरी करता था। दोनों भाइयों का परिवार पुश्तैनी मकान में ही रहता था।    उनके माता-पिता का निधन … Read more

जाने कब जिन्दगी में कौन सा मोड़ आ जाए ये कोई नहीं जानता – मुकुन्द लाल  : Moral Stories in Hindi

New Project 44

   श्रीमन अपनी पढ़ी-लिखी पुत्री मेधा की शादी अपने पड़ोसी शहर के बड़े व्यवसायी के लड़के ओमेश के साथ करके निश्चिंत हो गए कि एक जिम्मेदारी तो समाप्त हुई।    शादी के बाद ससुराल में सारी पारम्परिक औपचारिकताओं का विधिवत नार्वाह किया गया। इस तरह दोनों पति-पत्नी के दाम्पत्य जीवन का शुभारंभ हो गया।    मेधा को सास-ससुर … Read more

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