ढलती सांझ – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 46

शहर की हलचल और भागदौड़ से भरी इस ज़िंदगी में समय जैसे पंख लगाकर उड़ता है। ऑफिस के लंबे घंटे, परिवार की जिम्मेदारियां और अपने सपनों के पीछे भागते इंसान को शायद ही यह अहसास होता है कि उसकी ज़िंदगी की घड़ी धीरे-धीरे ढल रही है।  यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति, आदित्य मल्होत्रा की है, … Read more

जो अपने मां-बाप का दिल दुखाते हैं भगवान उन्हें जरूर सजा देते हैं – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 58

नई दिल्ली के एक चमचमाते फ्लैट में रक्षित और उसकी पत्नी माया रहते थे। वे दोनों मिडिल क्लास परिवार से थे, लेकिन रक्षित की कामयाबी ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया था। एक छोटे से बिजनेस से शुरुआत करके रक्षित अब एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के सीनियर मैनेजर बन गए थे। उनके पास … Read more

घर की इज्जत – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 57

रामपुर गांव में सुबोध गुप्ता का नाम आदर से लिया जाता था। वे गांव के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक थे और अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए मशहूर थे। सुबोध का मानना था कि शिक्षा ही समाज को प्रगति की ओर ले जा सकती है। उनकी पत्नी शीलू एक सुलझी हुई घरेलू महिला थीं, जो … Read more

आंखों पर चर्बी चढ़ना – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 49

अर्पित मल्होत्रा एक बड़े कॉर्पोरेट कंपनी का सीईओ था। उसने अपनी मेहनत और कुशलता से कंपनी को नए आयाम दिए थे। लोग उसकी सफलता की कहानियाँ सुनते नहीं थकते थे। लेकिन सफलता के साथ-साथ अर्पित में एक बदलाव आया। उसकी आँखों पर चर्बी चढ़ गई थी। वह अब दूसरों की परेशानियों को समझने या उनकी … Read more

अपमान बना वरदान – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 50

रवि वर्मा का नाम आज शहर के कोने-कोने में गूंजता है। लेकिन उसके सफल होने की कहानी साधारण नहीं है। यह संघर्ष, अपमान, और खुद को साबित करने की यात्रा है, जो यह सिखाती है कि असफलता और अपमान को भी एक वरदान में बदला जा सकता है। रवि एक मिडिल-क्लास परिवार में पला-बढ़ा था। … Read more

मैं बेटी के मोह में सही गलत का फर्क भूल गई – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

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लगातार टेलीफोन घनघना रहा था। अपने अपने मोबाइल होने के कारण घर का पीएनटी फोन बाहर रख दिया था और आज समय सुबह 4:00 बजे ही बचते हुए यह किसी प्रबल आशंका की तरफ सूचित कर रहा था। घुटने के दर्द के कारण सुशीला देवी को उठने में दिक्कत हो रही थी तो उन्होंने पास … Read more

मोहताज – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 35

गाँव के चौराहे पर हलचल मची थी। वहाँ एक नया मंच बनाया गया था, जिस पर बड़ा सा बैनर लगा था: “मोहताज कौन?” लोग इस अजीब से सवाल पर चर्चा कर रहे थे। सबको उत्सुकता थी कि आखिर यह सवाल क्यों पूछा जा रहा है। संध्या समय जब सूरज ढलने को था, तब एक युवक … Read more

अंगूठी का नगीना – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 39

समाज में हर व्यक्ति को किसी न किसी पैमाने पर मापा जाता है। यह मापदंड अक्सर बाहरी रूप, धन, या दिखावे पर आधारित होते हैं, जबकि वास्तविकता कहीं अधिक गहरी होती है। “अंगूठी का नगीना” का मुहावरा सदैव इस समाज की खामियों और वास्तविकता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यह कहानी एक ऐसी … Read more

गलती मेरी थी – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

New Project 99

जब उसके ‘केबिन’ में आ राधेश्याम ने बत्ती जलाई तो मानो अंधेरे की चादर में रोशनी की अनेक दरारें पड़ गई। उसी तरह से जैसे पिछले कई दिनों से वर्तिका की भाई अतुल के साथ संबंधों में दरारें आ गई थी। शुरू से महत्वाकांक्षी रही वर्तिका के जीवन का लक्ष्य बिना उतार-चढ़ाव के सीधी सपाट … Read more

अपना सा मुंह लेकर रह जाना – डा. शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

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शहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में साक्षी, एक सफल कॉर्पोरेट प्रोफेशनल, हमेशा अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटती रहती थी। उसे लगता था कि दूसरों की सफलता केवल दिखावा है, असली प्रतिभा तो बस उसी में है। एक दिन उसे अपनी पुरानी सहपाठी अदिति का सोशल मीडिया प्रोफाइल दिखा। अदिति ने अपने छोटे से बुटीक की … Read more

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