उम्मीद की किरण: लेडी सिंघम किरण सेठी

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लिंग-भेद हमारे समाज का एक ऐसा चलन है,जो इस 21वी सदी में भी समाप्त नहीं हो रहा, आज भी लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियां  लगाई जाती हैं। उनको घर से शाम ढलते ही कहीं जाना हो तो बोला जाता है कि अकेले मत जाओ,पापा या भाई में से किसी को साथ लेकर जाओ। अब … Read more

एक अनूठी प्रेम कथा – आरती झा आद्या

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बस मुझे मेरे धवल से मिलवा दो। उसे मेरे पास ले आओ ना..उनहत्तर वर्षीय सविता खन्ना बिछावन पर लेटे लेटे बच्चों सी बोली में बड़बड़ा रही थी।  बिछावन के बगल में बैठे डॉक्टर मित्तल और ब्रिगेडियर एक दूसरे को बुझी बुझी नजरों से देख रहे थे। ब्रिगेडियर साहब.. कौन है ये धवल… डॉक्टर मित्तल पूछते … Read more

माँ ने सिखाया – रिंकी श्रीवास्तव

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ये क्या बहु ..!! तुम बिना घूँघट  किये  बाहर से चली आ रही हो ,सारे मोहल्ले वाले देखेंगे  तो  क्या सोचेंगे  ,हमारी इज्जत का  जरा भी ख्याल नही है तुम्हे …!!  हमारे खानदान मे  बहुएँ   बिना  घूँघट  बाहर नही  निकलती   कितनी बार समझाया है तुम्हे  पर तुमने तो   सास  की बात न  … Read more

“पिया ,मोसे छल किए जाए” – सुधा जैन

New Project 97

 मैं एक नारी सब कुछ हारी  पर जीवन से ना हारी, सुनाती हूं अपने जीवन की दास्तान ….नाम नहीं लिखती ….कुछ भी कह सकते हो …।सलोनी… हां प्यारा सा नाम मेरा …अपने मम्मी पापा की लाडली बिटिया …मेरे बाद मेरी छोटी सी एक बहना और दो प्यारे से भाई…. मेरी मम्मी बहुत सहज ,सरल, प्यार … Read more

आशियाना – कमलेश राणा

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आज फिर मकानमालिक से राधा की बच्चों को लेकर तू- तू, मै- मै हो गई,, उसका बेटा रोहन साइकल चला रहा था कि अचानक से जोर जोर से उसके रोने की आवाज़ सुनकर वह बाहर आई,,  अरे, क्या हुआ मेरे बच्चे को,, मम्मा, नील ने मुझे धक्का दे दिया,, अरे,, ये तो खून निकल रहा … Read more

“किरदार बदल गए” –  तृप्ति उप्रेती

New Project 99

“मासी मां, मां उठ गई” ऑफिस से आते ही कार्तिक ने माया से पूछा। “हां बबुआ, बस अभी ही उठी। मैंने पानी पिला दिया है। तुम हाथ मुंह धो लो,तब तक चाय बनाती हूं।” कार्तिक फटाफट कपड़े बदलकर मां के कमरे में पहुंचा। मां चुपचाप अपने साफ-सुथरे पलंग पर लेटी थीं। कार्तिक ने पास जाकर … Read more

बहू भी बेटी ही होती है – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

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अपने इकलौते बेटे मनीष की शादी की तैयारीयों में सरोज जी इतना व्यस्त थी कि उन्हे अपनी भी सुध नही थी। बेटे की शादी में कोई कमी न रह जाए इसलिए बड़ी तन्मयता से हर चीज पर ध्यान दे रही थी। हंसते गाते सब काम निपटा रही थी। होने वाली बहू माही के लिए तो … Read more

त्याग या तपस्या – अर्चना कोहली “अर्चि”

New Project 77

दो महीने तक ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती नीरा दिल की धड़कन बंद हो जाने से हमेशा के लिए शांत हो गई। नीरा के निधन की खबर सुनते ही मोहित की आँखों में रुका हुआ सैलाब उमड़ पड़ा। फूट- फूटकर वह रो पड़ा। उसकी आँखों के सामने दो महीने पूर्व का मंजर घूम … Read more

ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा – डॉ. पारुल अग्रवाल

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प्रिया आज जब शाम को  की आज शाम को टहल रही थी तो पीछे से किसी ने डॉक्टर प्रिया कह कर आवाज़ दी, प्रिया एकदम से चौंक गई क्योंकि कम ही लोग उसके नाम के आगे डॉक्टर लगाते थे। उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी ही सोसायटी में रहने वाली नीरजा थी।  औपचारिक बातचीत के … Read more

हैसियत – सविता गोयल

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 ” हूंह… एक भी सामान ढंग का नहीं दे रखा जो हमारे घर में रखा जा सके।  कपड़े लत्ते भी ऐसे दिये हैं कि सारे रिश्तेदारों के सामने हमारी नाक कट गई।  हमने तो सोचा था सरकारी मास्टर की इकलौती बेटी है तो कम से कम ब्याह तो ठीक से करेंगे … लेकिन यहां तो … Read more

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