Moral Stories in Hindi : अरे नीति तुम ??? नजर पड़ते ही सीमा ने पूछा…बस कल ही पहुंची हूँ आंटी…!! नीति सीमा के मुहल्ले में रहने वाली शर्मा परिवार के दूसरे नंबर की बिटिया है… शर्मा जी के दो बेटे और दो बेटियाँ है…I बड़ी बेटी प्रीति की शादी संपन्न परिवार में हुई थी… शादी के बाद प्रीति अपने मायके में जब भी आती सभी भाई बहनों के लिए ढ़ेर सारे उपहार लेकर आती….जिससे मायके में उसकी काफ़ी इज्जत और रुतबा थी….!!
वहीँ दूसरी ओर नीति की शादी जिस परिवार में हुई थी वो आर्थिक रूप से थोड़े कमजोर थे…और बेटे के कैंसर की बिमारी ने नीति को और कमजोर बना दिया था…..!!
अपने घर घूमने आने का न्योता सीमा ने नीति को दे दिया…..I मिलनसार स्वभाव के कारण मोहल्ले में दोनों बहनों की काफी इज्जत होती थी… मोहल्ले की आंटियों से काफी प्यार मिलता था…।
शाम होते ही नीति अपने बच्चे के साथ सीमा के घर पहुंची….! …….कैसी हो नीति……..ससुराल में सब कैसे है……..तुम अचानक कैसे……???? तुम्हारी भाभी ने तो कुछ भी नही बताया कि तुम आने वाली हो…….औपचारिक बातों को बढ़ाते हुए सीमा ने न जाने कितने सवाल पूछ लिये…..I बारी बारी सभी सवालों का हाँ, नहीं में उत्तर दे ही रही थी इसी बीच उनका 6–7 साल का बेटा भूख लगी है –भूख लगी बोल के रोने लगा I मिक्सचर, बिस्कुट, चाय के बाद भी वो चुप होने का नाम नहीं ले रहा था…….! नीति बार बार उसे आँख दिखा कर डराने और चुप कराने की कोशिश कर रही थीं…I पास में ही सीमा ने सब्जी बनाने के लिए आलू उबाल कर रखा था उसे देख कर……खाऊँगा…..खाऊँगा का रट लगा दिया बच्चे ने….! सीमा समझ चुकी थी बच्चा बहुत भूखा है….उसने उसे खाना खिला कर शांत किया….I
नीति बच्चे के व्यवहार पर झेंप रही थी….” पर बच्चा तो बच्चा “…! नीति ने झेंपते हुये कहा…..आंटी अभी इसका दूध का समय था इसीलिये रो रहा है…I भाभी के बच्चे अभी ट्यूशन पढ़ रहे हैं जब पढ़ के उठेंगे तो भाभी उनके साथ ही इसको भी दूध देंगीं….I सीमा सोचने पर मजबूर हो गई बच्चा भूखा अभी है और दूध बाद में मिलेगा….क्यों…..??? सीमा ने ढीठ बन कर पूछ ही लिया……आपने खुद ही निकाल कर क्यों नहीं दे दिया बच्चे को दूध……!! नीति की चुप्पी सब कुछ बयां कर रही थी ….!!!!
माँ- बाप के जाते ही बिटिया कब पराई हो जाती है पता ही नहीं चलता….! वही मायका जहां जन्म होता है इतना पराया हो जाता है कि अचानक मायके आ जाने से सबके चेहरे पर प्रश्नचिन्ह……क्यों……कैसे ….कब तक….!!
नीति की बड़ी दीदी प्रीति आर्थिक मामले में सुदृढ़ होने के साथ-साथ एक निर्भीक और हिम्मती महिला भी थी…..I भाइयों को पता था बड़ी बहन प्रीति आर्थिक रूप से इतनी मजबूत है….मायके की प्रॉपर्टी
से उन्हें कोई लेना-देना नहीं होगा…..I और छोटी बहन नीति खुद में इतनी कमजोर है कि प्रॉपर्टी के लिए हमसे बगावत नहीं करेगी…I
जब बड़ी बहन प्रीति को पता चला कि दोनों भाइयों ने माता पिता की पूरी संपत्ति आपस में बांट लिया….और उन्हें इस प्रक्रिया में बहनो की जरूरत भी नहीं पडी….
तब प्रीति ने सोचा… क्या मां-बाप के रहते ही बेटियां मायके में ममता , प्यार , अपनापन की हकदार होतीं है…” ममता ” शब्द सिर्फ मां-बाप तक ही सिमट कर रह गया है ..माना मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी है पर छोटी बहन नीति की…. नहीं नहीं मैं बड़ी हूं मुझे ही कुछ करना होगा …कम से कम मायके आना जाना लगा रहेगा तो भाई भाभी से जुड़े रहना संभव होगा और धीरे-धीरे ” ममता ” पनप ही जाएगी… और वैसे भी हम बहने तो भाइयों पर प्यार लुटाती ही हैं..।
क्या धन दौलत संपत्ति रिश्तो से इतनी ऊपर हो गई हैं… बचपन मैं साथ खेले कूदे अपने ही भाई बहन इतने दूर हो जाते हैं …बहनों को हिस्सा ना देना पड़े इसलिए उनसे कोई मतलब ही ना रखा जाए तो बेहतर होगा , क्या भाइयों की सोच ऐसी हो गई है ?
फिर तो धीरे-धीरे मायके में ,उसे घर में, जहां हमारा जन्म हुआ , जहां से हमारी अनेक यादें जुड़ी हैं …जिस आंगन में हमने खेला कूदा और बड़े हुए हैं ….वहां से हमारा अस्तित्व ही समाप्त जाएगा…!
प्रीति ने मन ही मन निर्णय लिया….
उसने यहां आकर नगर पालिका व कोर्ट में जाकर वकीलों की सलाह लेकर स्पष्ट शब्दों में भाइयों से कह दिया………” मैं जानती हूं हम बहनो ने अपने माता-पिता के जमीन जायदाद में हिस्सा ले लिया तो आप लोगों से संबंध हमेशा के लिये खराब हो जायेगा…….कानून चाहे जितना भी बन जाए , वैधानिक अधिकार भी लड़कियों को मिल जाए …पर अभी भी मानसिकता बदलने में समय लगेगा “……!!!
हम दोनों बहनों को अपना अपना हिस्सा तो नहीं ..पर इतना तो अवश्य चाहिये कि हम यहां आकर अपनी मर्जी से अपने कमरे में रह सकें……जब चाहे आ–जा सकें I ऐसा होने से आप लोगों को भी कोई असुविधा नहीं होगी…..I
यदि आप लोगों को मंजूर है तो ठीक है वरना अभी आप लोगों ने दो हिस्सों में बांटा है फिर चार हिस्सा होगा…I बड़े ही बेबाकी से प्रीति ने अपनी बात पूरी की….I
प्रीति की बातें सुनकर भाई आवाक रह गये….भाइयों के पास इसके सिवा कोई और विकल्प भी नहीं था…..एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा उन्होंने बहनो के नाम कर दिया…..I
प्रीति ने उस जमीन पर दो कमरे का एक छोटा सा घर बनवा दिया……और अब जब चाहें दोनों बहने आतीं है आराम से रहती है…..अब मायका आने में संकोच या हिचक नहीं……!!
अब ये डर भी नहीं…भैया भाभी नहीं बुलाये तो वो जगह ही छूट जायेगी जो कभी हमारी भी थी…I
सबसे बड़ी बात अस्तित्व की लड़ाई लड़कर , जीतकर …प्रीति और नीति दोनों बहनों का भाई भाभी के सानिध्य में प्यार , ममता के अंकुर फूटने प्रारंभ हो गए ।
( स्वरचित मौलिक और सर्वाधिकार सुरक्षित रचना )
# ममता
श्रीमती संध्या त्रिपाठी