अलार्म – कंचन श्रीवास्तव

Post View 231 आज जाने क्यों नींद आंखों से कोशों दूर है , कुर्सी पर बैठा बैठा पनामा की कितनी डिब्बियां खाली कर चुका हूं पर यादें है कि ठहरने का नाम नहीं ले रही , बिस्तर में जाऊं भी तो जाऊं कैसे ये तो जैसे काट खाने को दौड़ रहा। इससे पहले कभी इतनी … Continue reading अलार्म – कंचन श्रीवास्तव