आज ऑफिस में सब तरफ गहमागहमी है। किसी का भी काम में मन नहीं लग रहा है। आखिर आज ऑफिस में सबकी सालभर की मेहनत का नतीजा वेतन-वृद्धि के रूप में जो मिलना है।
एक-एक करके सब बॉस के ऑफिस में आ-जा रहे थे। किसी के मुखमंडल पर खुशी तो किसी के मुखमंडल पर उदासी की रेखायें आ-जा रही थीं।
महिमा के मन में भी अपनी वेतन-वृद्धि को लेकर उत्सुकता है। वह एक सीधी-साधी और शर्मीली लडकी है। काम उसके लिए एक जुनून है। इसी कारण वह चुपचाप काम में लगी रहती है।
महिमा इस ऑफिस में पिछले दस वर्षों से काम कर रही है। जी-तोड़ मेहनत करती है। बॉस और इंचार्ज भी उसके काम से बहुत खुश हैं। सभी उसके काम की तारीफ करते हैं। लेकिन यह उसका दुर्भाग्य कहें या कुछ और। पूरे विभाग में उसकी वेतन-वृद्धि ही सबसे कम होती है, जबकि काम उसे ही सबसे अधिक दिया जाता है। यहाँ तक कि देर तक ऑफिस में भी उसे ही रोका जाता है। कई बार तो जो प्रोजेक्ट महिमा का नहीं होता, उसकी जिम्मेदारी भी उसपर डाल दी जाती है।
बाकी वर्षों की तरह इस वर्ष भी उसकी वेतन-वृद्धि बहुत कम हुई। उसकी आंखें छलक आईं। सोचने लगी, आखिर बॉस और इंचार्ज द्वारा काम पसंद करने के बावजूद उसका वेतन सबसे कम क्यों बढ़ता है। उसमें क्या कमी है। वेतन-वृद्धि का पत्र लेकर उदास मन से वह चुपचाप ऑफिस से बाहर आ गई और अपने काम में लग गई।
घर पर उसके चेहरे पर झलक रही उदासी को पति ने भांप लिया। रात को डिनर के बाद कमरे में जाते ही पति ने उससे उसकी उदासी का कारण पूछा।
पति के पूछते ही उसके सब्र का बांध टूटकर बिखर गया। चुपचाप वेतन-वृद्धि पत्र उनके हाथ में पकड़ाकर वह छोटी बच्ची की तरह फूट-फूटकर रो पड़ी।
पति महिमा से बोले, “इसका हल रोना नहीं आत्मविश्वास है। हिम्मत करके दृढ़ता से तुम्हें ही बॉस से बात करनी होगी’। पति की बातों से महिमा में हिम्मत आई।
अगले दिन ऑफिस में बॉस के आते ही महिमा ने फोन पर उनसे जरूरी काम कहकर मिलने की बात की। बॉस ने कमरे में उसे बुलाया।
महिमा ने मन में जो था कह दिया और कहा, ,मुझे इंक्रीमेंट नहीं चाहिए और पत्र लौटाकर वापस सीट पर आकर काम करने लगी।
बॉस ने इंचार्ज से इस संबंध में बात करके नया इंक्रीमेंट पत्र बनवाया। इस बार महिमा को वेतन-वृद्धि के साथ तरक्की का पत्र भी मिला। उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। आज भी वह इसका श्रेय अपने पति विश्वास को देती है, जिनकी वजह से उसमें हिम्मत आई और वह अपनी बात बॉस के आगे रख पाई।
सच है, अपने हक के लिए आवाज़ उठानी ही पड़ती है।
अर्चना कोहली ‘अर्चि’
नोएडा (उत्तर प्रदेश)
स्वरचित