रामदीन एक गरीब रिक्शावाला हंसमुख नेक दिल व्यक्ति है । उसकी पत्नी रमिया (रामेश्वरी) भी अपने पति की तरह ही हंस मुख स्वभाव की है ।
उनकी एक बेटी है राधिया । रामदीन सुबह 6:00 बजे चाय के साथ दो रोटी खाकर अपना रिक्शा लेकर निकल जाता है । दोपहर का खाना वह एक छोटे से ढाबे पर खा लेता है । कभी-कभी उस ढाबे वाले को कुछ सामान आदि मंगाना हो तो लाकर दे देता है । सवारी से भी पैसे अपनी मेहनत के हिसाब से लेता है । कभी पैसों के लिए झिक झिक नहीं करता । सवारिया भी खुश । कभी कोई बुजुर्ग हो तो उनका सामान भी उनके घर छोड़ देता था । रमिया भी पास पड़ोस में झाड़ू पोछा कर लेती है । दोनों का मिलकर उनकी गृहस्थी लगभग ठीक से चल रही है ।
रधिया अपनी पढ़ाई मैं लगी रहती है । जब रात को उसका बापू रिक्शा लेकर आता है तो वह रिक्शे की घंटी सुनकर जल्दी से दौड़ती हुई आती है । बापू आ गए चिल्लाती हुई गेट खोलती हैं । उसका हाथ देखती हैं । बापू कोई चीज लेकर आया होगा । फिर जल्दी से पानी लेकर आती है बापू के लिए । रमिया चाय बनाकर ले आती है ।
दोनों बैठकर चाय पीते हैं । रामदीन चाय पीकर हाथ मुंह धो कर आता है । फिर तीनों खाना खाते-खाते दिन भर की बातें करते हैं । खाना खाने के बाद रधिया अपने बापू का हाथ देखती हैं । और कहती है बापू तुम इतनी मेहनत करते हो । हाथ कैसे हो गए हैं । तब रामदीन अपनी बेटी राधिया से कहता है बेटा मेहनत करूंगा तभी तुझे पढा पाऊंगा । तू पढ़ लिखकर अच्छी सी नौकरी करें हम दोनों की तरह से इतनी मेहनत ना करनी पड़े । फिर तेरी शादी करूंगा । उन सबके लिए पैसे तो चाहिए होगा ना ।
शादी के नाम से राधिया के आंखों में आंसू आ जाते हैं । वह कहती है बापू मैं शादी नहीं करूंगी मैं अपने मां-बाप को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी । तुम दोनों के पास ही रहूंगी ता उम्र
रामदीन ने बड़े प्यार से उसको समझाया बेटा बेटियों को तो राजा महाराजा भी अपने घर नहीं रख पाए हैं । तो मै किस खेत की मूली हूं ।
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राधिया बोली मेरा बापू किसी राजा से कम है क्या । मैंने कह दिया मैं तुम दोनों को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाली हूं । दोनों मां-बाप कहते हैं ठीक है । यह सुन उसकी आंखों के आंसू मोती बन झिलमिलाने लगे और वह दोनों के गले लग गई ।
अब रधिया खूब मेहनत लगन से अपनी पढ़ाई में लग गई । जब रात को बापू थका हारा आता तो वह चाय बना देती । मां से कहती तुम दोनों खाना खाओ रोटियां मैं बनाऊंगी । मां के न करने पर वह कहती तू बापू से बातें कर खाना खा रोटी बनाकर मैं भी आती हूं ।
अब राधिका बड़ी हो गई बीकॉम पूरा हो गया । उसने बैंक की सर्विस के लिए इंटरव्यू देने शुरू कर दिए। एक दिन उसके नाम का लेटर आया । जब उसने देखा उसको सर्विस के लिए बुलाया गया है तो वह खुशी से उछलकर मा से लिपट गई । जब रात को बापू आया बोली अपने हाथ दिखा उसने लेटर हाथ पे रख दिया बापू मेरी सर्विस का कॉल लेटर है । यह सुन रामदीन व रधिया दोनों की आंखों में आंसू आ गए । कल मेरे को बुलाया है । जब मां बापू का चेहरा देखा उनकी आंखों में आंसू देखकर वह बोली तुम दोनों रो रहे हो । वह बोल पगली रो नहीं रहे हैं यह तो खुशी के आंसू हैं । जो आंसू मोती बनकर टपक रहे हैं ।
रजिया ने अब बैंक में नौकरी शुरू कर दी ।
उसके बैंक में साथ में काम करने वाला राघव उसके पास वाले केबिन में बैठता था । रजिया उससे कुछ पूछने गई । राघव उसके कार्य करने के शैली को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था । वह उसको पहली ही नजर में अच्छी लगने लगी थी । दोनों की कभी-कभी आपस में थोड़ी बहुत बातचीत होती रहती । बातों बातों में रधिया को राघव के बारे में पता चला । राघव एक अनाथ आश्रम का लड़का है । वह पढ़ने लिखने में बहुत अच्छा था । एक दिन अनाथ आश्रम के एक बाबूजी की नजर उस पर पड़ी ।
उसे देख उनको उस पर दया आ गई । उन्होंने पूछा तुम पढ़ना चाहते हो । राघव ने कहा पढ़ना तो चाहता हूं पर पढ़ूंगा कैसे । उन बाबूजी ने कहा मैं पढ़ आऊंगा । यह सुन राघव की आंखों में आंसू मोती बनकर छलकने लगे । उन बाबूजी ने मुझे नया जीवन देकर यहां तक पहुंचा दिया । आज 7 अप्रैल है रधिया की मां बापू का शादी का दिन । उसने अपने साथ के दो-चार कर्मचारियों को बुलाकर छोटी सी पार्टी करी ।
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राघव और उसके बाबूजी भी आए थे । मां बापू को राघव व्यवहार कुशल लगा । बाबूजी से उसकी शादी के बारे में पूछा । वह बोले शादी करना तो चाहता हूं । मैं भी इस जिम्मेदारी से फारिक हो जाऊं ।
इसका घर बस जाए । रधिया के बापू ने कहा
हमारी बेटी आप दोनों को पसंद आए फिर मैं अपनी बेटी से बात करता हूं ।
सबके जाने के बाद रधिया के बापू ने रधिया से बात की । वह बोली मैं कहीं नहीं जाऊंगी । तब उसने समझाया वह अकेला लड़का है । शादी के बाद यही अपने सब साथ रहेंगे । इस बात पर राजी हो गई । एक महीने बाद दोनों की शादी हो गई । अब राघव बाबूजी हम सब साथ ही रहते हैं ।
2 साल बाद रधिया का प्यारा सा बेटा हो गया । अब तो पूरा परिवार बहुत खुश । अपने बगीचे में बैठे दोनों अपनी नव बगिया में खेलते हुए पुष्प को देखकर मंद मंद मुस्कुराते आपस में बातें करते हुए सोच रहे हैं भगवान ने वास्तव में आंखों में आंसुओं की जगह मोती दिए हैं ।
आंसू बन गए मोती
लेखिका
सरोजनी सक्सेना