आखिरी फैसला – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

कमल ने जैसे ही सुमन (बेटी) और कमला(पत्नी ) को घर के अंदर आते देखा ,गुस्से में बोला तुम दोनो का दिमाग खराब हो गया है ,बस गाना, गाना ,उसके अलावा कोई काम ही नहीं है | कमला ,क्यों बेटी की जिंदगी बर्दाद कर रही हो? उसको समझाने की जगह तुम खुद ही उसको ले के जाती हो हर जगह गाने के प्रोग्राम में |

कुछ नहीं मिलने वाला इस गाने से | कब से  मम्मी पापा खाने का इंतजार कर रहे है | जाओ जल्दी खाना दो सबको | कमला ने बेटी को इशारा किया की अंदर जाओ तुम | और खुद किचन में चली गई खाना लाने के लिए | मन ही मन सोचती की क्या करू? की कमल अपने बेटी को समझे ?

उसकी खुशी डॉक्टर , इंजीनियरिंग बनने में नहीं है | वो गायिका बनना चाहती है | खैर  कमला ने सबको खाना खिलाया और बेटी के पास चली गई | बेटी को रोता देख बोली क्या हुआ,मेरी प्यारी बेटी को ? सुमन रोते हुए बोली मम्मी मुझे बुरा लगता है ,जब आपको मेरे कारण पापा डांटते है 

,और आप चुप चाप सुन लेती है | अब मैं गाना नहीं गाऊंगी | नहीं बेटा कोई बात नहीं | सब ठीक हो जाएगा | तुम अपने लक्ष्य पे ध्यान दो | कुछ भी पाना आसान नहीं होता |

अगले दिन कमल ने सुमन को बुलाया और बोला | देखो सुमन अपने पढ़ाई पे ध्यान दो | गाने में कोई कैरियर नहीं है | डॉक्टर बनो , बेटा पापा की बात मानो | सुमन ने बोला पापा ,मै गाना गाना चाहती हूं  ,नेहा कक्कड़ जैसा बनना चाहती हूं |  बिल्कुल नहीं ऐसा नहीं होगा | यह मेरा “आखिरी फैसला” है | जाओ यहां से और मैं जो कहूंगा वहीं होगा समझी |

कमला  सब कुछ सुन रही थी | कमला ने मन ही मन सोचा की मुझे भी अब अपना “आखिरी फैसला “लेना होगा | 

सुमन बेटी को ले के  दिल्ली चली गई |और उसे   सिंगिंग क्लास ज्वाइन करा दिया | १ साल का कोर्स था | और बेटी को समझाया की बेटा खूब मन लगा के सिखना ,खुश रहना | कुछ कर के दिखाना है तुमको | मम्मी लेकिन पापा? पापा को मै देख लूंगी बेटा |

कमल अब कमला से नाराज रहता था | बात तक नहीं करता था | कमला भी ज्यादा नहीं सोचती थी | वो अपने मन को मज़बूत बना चुकी थी | 

कमल अख़बार पढ़ रहा था | उसने आवाज लगाया ,कमला सुनो ,जल्दी आओ | सुमन की फोटो आई है अखबार मै | क्या ? कहा ? और क्यों? रुको रुको बताता हूं,पहले पढ़ तो लूं | कमल चुप हो गया |

कमल बोलो भी कुछ? अखबार हाथ से छीनते हुए खुद देखने लगी | सुमन ने गाने की प्रतियोगिता जीती थी | उसमे पहला स्थान आया था |सुमन का इस लिए फोटो निकला था अखबार में |

कमला बहुत ही ज्यादा खुश थी | लेकिन कमल से कुछ कह ना सकी |कमरे में चली गई ,सुमन को कॉल किया | सुमन बेटा बहुत बहुत बधाई हो तुमको | मम्मी पापा कैसे है? पापा अभी भी गुस्सा है क्या? बोलो ना मम्मी ? नहीं बेटा | सब ठीक है | मम्मी हमको इनाम में  एक लाख रुपया मिलेगा |

वाह अच्छा है | इतनी खुशी की बात है | लेकिन तुम इतना उदास क्यों हो? मम्मी यहां आपको और पापा की बुलाया गया है | कुछ पेपर वर्क है | उसके बाद ही पैसा मिलेगा हमको | ओके ओके मै आऊंगी बेटा | बाय बाय | 

कमल कमरे के बाहर सब सुन रहा था | कमला जैसे ही मुड़ी देखा कमल के आंखों में आंसू थे | कमल ने बोला कब जाना  है दिल्ली ?सुमन से बात करके बताना | तुम्हारा टिकट करा दूंगा | कमला ने बोला ठीक है ,बता दूंगी | 

कमला अपने बेटी के पास आ गई |आज सुमन को ईनाम के रूप में एक लाख रुपए मिला |कमला और सुमन दोनो  बहुत खुश थी | अपनी बेटी  की जीत पे कमला बहुत ज्यादा खुश थी |सुमन का एक साल का कोर्स भी पूरा हो गया था |कमला अपनी  बेटी को ले के घर आ गई | कमल दोनो को देख के खुश तो बहुत हुआ | लेकिन बात नहीं कर रहा था | 

आज कमला के सब्र का बाध टूट गया |और कमल से बोली , कमल क्या तुमको लगता है ,की मैने जो किया गलत किया ? बोलो ? कमल ने कुछ नहीं बोला , चुप था | कमला ने बोला कमल ” जरूरी नहीं है की हमारी बेटी डॉक्टर ही बने , वो डॉक्टर नहीं बनना चाहती | तुम्हारे लिए क्या सिर्फ पैसा कमाना ही जरूरी है ?   कमल देखो हमारी बेटी कितनी खुश है |

मै अपनी बेटी खुशी चाहती हूं और अपनी बेटी की खुशी के लिए कुछ भी कर सकती हू |

कमल रो रहा था | उसने कमला को गले लगा लिया | बोला तुमने बिल्कुल सही फैसला लिया कमला | मै बहुत खुश हूं |

“आज कल मां बाप बच्चों को डॉक्टर इंजीनियरिंग बनाने में लगे है ” सबसे जरूरी है ,बच्चे की खुशी | बच्चे को सही गलत जरूर बताए | लेकिन बच्चे की मानसिक स्थिति को जरूर ध्यान दे | 

कमला ने अपनी बेटी के खुशी के लिए” आखिर फैसला ” ले के बहुत अच्छा किया | 

अब कमल ,कमला और सुमन तीनो बहुत खुश थे |

रंजीता पाण्डेय

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