रचना और खुश्बू बहनें थीं, लेकिन दोनों की जिंदगी की राहें बहुत अलग थीं। रचना, जो घर में सबसे बड़ी थी, एक बेहतरीन कुक थी। उसके हाथों का बना हुआ खाना लोगों को खास बना देता था। वहीं, खुश्बू को खाना बनाना बहुत कठिन लगता था। वह कभी भी रसोई में ज्यादा समय नहीं बिताती थी,
और उसका विश्वास था कि खाना बनाने की कला में वह कभी रचना जैसा नहीं बन सकती। खुश्बू का यही डर था कि जब लड़के वाले देखने आएंगे तो वे उसकी खाना बनाने की काबिलियत पर सवाल उठाएंगे। यह विचार उसे परेशान कर रहा था, लेकिन रचना की मदद से उसे अपनी असुरक्षा पर काबू पाना था।
खुश्बू की ननद के घर लड़के वाले देखने आने वाले थे, और रचना ने पूरे परिवार को यह भरोसा दिलाया था कि सब कुछ सही हो जाएगा। घर में सभी लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे। रचना ने सभी को एक साथ मिलकर खाना बनाने की सलाह दी। “माँ जी और मैं तैयार हो जाते हैं, तुम बाद में तैयार होना,” रचना ने खुश्बू से कहा।
खुश्बू बहुत नर्वस थी क्योंकि उसे यकीन था कि लड़के वालों को उसका खाना पसंद नहीं आएगा। उसे यह भी डर था कि अगर खाना अच्छा नहीं बना तो वह और उसके परिवार के लिए शर्मिंदगी का कारण बनेगा। लेकिन रचना ने उसे सांत्वना दी और कहा, “चिंता मत करो, हम साथ में खाना बनाएंगे, सब कुछ अच्छा होगा।”
रचना ने अपनी ननद भाभी के साथ मिलकर सारी तैयारी की। सबकुछ सम्हालने के बाद रचना ने खुश्बू को रसोई से बाहर बुलाया। “खुश्बू, अब तुम तैयार हो जाओ, सब कुछ ठीक हो जाएगा।” रचना ने उसे समझाया।
वो थोड़ी देर में रसोई से बाहर आई, लेकिन उसके चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था। मेहमान आ चुके थे, और खुश्बू को लग रहा था कि समय निकलने के बाद भी वह सही तरीके से तैयार नहीं हो पाई। लेकिन रचना ने उसे हिम्मत दी, “तुम बस आराम से बैठो, सब ठीक हो जाएगा।”
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जब खुश्बू मेहमानों के सामने आई, तो उसने सॉरी कहा, “मुझे खाना बनाने में इतना टाइम लग गया कि समय का पता ही नहीं चला।” हालांकि, रचना ने सबको ऐसा माहौल दिया था कि सबको खाना बहुत पसंद आया। रचना के साथ मिलकर खाना बनाने का अनुभव खुश्बू के लिए एक नई शुरुआत थी। मेहमानों ने उसकी मेहनत की सराहना की, और खुश्बू को महसूस हुआ कि वह अब उस पुराने डर से बाहर निकल चुकी है।
उस दिन के बाद, खुश्बू ने सोचा कि अगर वह खाना बनाने में थोड़ी और मेहनत करे तो वह भी एक अच्छी कुक बन सकती है। उसने इस बात को अपनी ताकत के रूप में लिया और खुद को एक नई दिशा देने का फैसला किया।
अगले दिन खुश्बू ने कुकिंग क्लासेज जॉइन कीं। शुरुआत में उसे बहुत कठिनाई हुई, लेकिन रचना ने उसे हमेशा प्रेरित किया। “तुम कर सकती हो, खुश्बू। बस मेहनत करो।” यह शब्द खुश्बू के दिल में घर कर गए थे। उसने कड़ी मेहनत की, कुकिंग क्लासेज में पूरी लगन से भाग लिया, और धीरे-धीरे उसकी कुकिंग स्किल्स में सुधार आने लगा।
कुकिंग में दक्षता पाने के बाद, खुश्बू ने अपने आत्मविश्वास में भी इज़ाफा किया। उसने न केवल खाना बनाना सीखा, बल्कि खाना बनाने के साथ-साथ नए-नए व्यंजन बनाने की कोशिश भी की। उसकी मेहनत रंग लाई और उसकी कुकिंग की तारीफ भी होने लगी। धीरे-धीरे वह एक कुकिंग एक्सपर्ट बन गई। उसकी खाना बनाने की कला ने उसे न केवल आत्मविश्वास दिया, बल्कि उसने घर-परिवार की चिंता भी दूर की।
खुश्बू की शादी के बाद भी उसने अपनी कुकिंग स्किल्स को जारी रखा। शादी के पहले दिन से ही उसने नए-नए पकवान बनाए और परिवार के सभी सदस्य उनकी तारीफ करने लगे। खुश्बू को यह एहसास हुआ कि एक लड़की के रूप में, शादी के बाद भी उसे अपने सपनों को पूरा करने का पूरा हक है। उसका आत्मविश्वास और कुकिंग के प्रति उसका प्यार उसे जीवन के हर मोड़ पर मददगार साबित हुआ।
लेखक
एम.पी.सिंह
(Mohindra Singh)