अरे वाह ….इस बार बॉस कोई लेडी आ रही हैं…. ऑफिस में चारों ओर बढ़ी चर्चा थी….ऑफिस में ही नहीं सारे इलाके में भी काफी चर्चा थी….!
मैडम बड़े दिलवाली हैं… इतने बड़े ओहदे पर हैं पर उनके काम में ईमानदारी व पारदर्शिता साफ झलकता है ….उन्हें सामाजिक कार्यों में विशेष रूचि है …..!
विशेषकर गायों की सेवा और वृक्षारोपण में वो विशेष ध्यान देती है वगैरह वगैरह…..!
आइए मैडम… जीप का दरवाजा खोलते हुए जूनियर अधिकारी ने झरना का स्वागत किया……..लंबी …सुडौल .. आकर्षक…. सिल्क की साड़ी पहने… झरना गजब की आकर्षक लग रही थी…. एक तो सुंदर थी ही ….. ऊपर से पद की गरिमा ने उस पर चार चांद लगा दिए थे…..।
जीप में बैठकर कुछ दूर जाते ही…. एक झुंड में गाय बैठी थीं… झरना ने गाड़ी रोकने का संकेत दिया…. गाड़ी से उतर कर गायों को गुड़ खिलाया और प्रणाम कर वापस गाड़ी में आकर बैठ गई…… आज वो अपने इलाके का जायजा ले रही थी…. कहां पर और क्या बेहतर कर सकते हैं ….खाली जगह देखकर पौधे लगाने का भी विचार बना रही थीं…..।
चुकी झरना इतने बड़े पद पर थी जिसके कारण अन्य अधिकारियों ने कुछ पूछने में संकोच महसूस की….।
धीरे-धीरे झरना मैडम की चर्चाएं चारों और होने लगी उनकी ख्याति चारो ओर फैलने लगी…. उनकी ये आदतें उनकी दिनचर्या में शामिल थी …अब तो उनके साथ गाड़ी में बैठे अन्य अधिकारी स्वयं भी गायों या अन्य जानवरों को देखकर गाड़ी रोक दिया करते थे… और उनकी गाड़ी में कुछ पौधे व पौधों के बीच भी रखे होते थे जिसे समय व परिस्थिति तथा जगह देखकर रोप दिए जाते थे…. ।
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इसी क्रम में एक दिन झरना मैडम व कुछ अधिकारी टूर पर निकले…. गायों को देख कर गाड़ी धीरे करते हुए एक अधिकारी ने पूछ ही लिया ….मैडम आपका व्यक्तित्व काफी अलग व आकर्षक है …….
बस इतना ही तो कहा था उस अधिकारी ने ………पर झरना मैडम को अपनी तारीफ के पीछे… कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई …..जिसे उन्होंने आज अपने सहयोगी अधिकारियों से साँझा कर ही दिया…..
इतनी परेशान क्यों दिख रही हो झरना….? सब ठीक तो है ना…. हाँ रतन ….वो पर्यावरण दिवस पर सौ पेड़ लगाने का टारगेट पूरा करना था ऊपर से आदेश था …..पूरा नहीं हो पाया….. अब क्या होगा ….? सुनने में आ रहा है आज जांच कमेटी आ रही है…. पौधे कम होने पर स्पष्टीकरण की मांग की गई है…. उन्हीं सब कारणों से थोड़ी परेशान हूँ…..झरना ने अपने पति रतन से अपनी परेशानी बताई….।
पर तुम लोगों ने पर्यावरण दिवस पर पेड़ लगाने का टारगेट पूरा किया तो था …..फिर परेशानी क्या है….?? मैंने पेपर में पढ़ा था बड़े बड़े अक्षरों में तुम्हारा नाम व तुम्हारी प्रशंसा लिखी हुई थी …….और तो और …मैंने पौधा रोपण करते हुए तुम्हारी फोटो भी देखी थी ….फिर….? और तुमने तो कुछ बचे पौधे घर भी लाए थे…..? रतन ने आश्चर्य से पूछा….!
अरे रतन तुम भी ना… जानते नहीं हो ….कागजी कार्यवाही … पेपर बाजी ….बहुत अलग बात होती है और जमीनी हकीकत बहुत अलग …..तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे तुम्हें कुछ मालूम ही नहीं …..झरना ने खीझते हुए कहा…।
खैर ….तुम छोड़ो… मैं देखती हूं …अब क्या करना है ….झरना आज अपने द्वारा किए गए कुछ भ्रष्ट कार्यों में खुद ही उलझ गई थी….। हालांकि झरना को ये मामला इतना भी संगीन नहीं लग रहा था…. पर कहते हैं ना…… गलत तो गलत ही होता है ….वो छोटा हो या बड़ा…..
जब तक चोर पकड़ाता नहीं वो हमेशा शेर ही बना रहता है…. थोड़े से लालच व निजी स्वार्थ की खातिर अपने पद और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर रही थी…!
अगले दिन …झरना कार्यालय में बैठकर इस स्थिति से उबरने की योजना बना रही थी ….तभी कार्यालय के सामने बैठी गाय पर उसकी नजर पड़ी …..जो बड़े इत्मीनान से जुगाली कर रही थी….! इसी गाय को देखकर झरना को एक उक्ति सूझी और उसने एक योजना बना डाली….।
स्पष्टीकरण में झरना ने साफ साफ लिख दिया ….सारे पौधे गाय चर (खा ) गई…! चूंकि…बाउंड्री वॉल या तार लगाने के लिए कोई फंड की व्यवस्था नहीं थी ….इसीलिए ऐसा हो गया ……!
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मतलब पूरा मामला अनबोलते पशु गाय पर डाल दिया गया….
हालांकि झरना मैडम के स्पष्टीकरण से सहयोगी अधिकारी आश्चर्यचकित भी थे …. वो सोच रहे थे …जब मैडम ने कुछ पौधे के बदले सिर्फ टहनी लगाने को बोला था………
जब पौधे लगे ही नहीं थे…….तो फिर गाय कैसे खा (चर) सकती है….??
मैडम ने ही तो … पौधों के बीच बीच में सिर्फ टहनियां ही लगाने को कहा था …..और पौधों को अपने घर भेज दिया था…।
फिर गाय चरने वाली बात….???
खैर…. आनन-फानन में जो भी बन पड़ा ….पूरी कोशिश करके किसी तरह मामला को रफा-दफा कराया गया ….पर कहते हैं ना…. गलत तो गलत ही होता है ….कहीं ना कहीं झरना को पहली बार एहसास हुआ कि उसकी नौकरी के साथ साथ.. सभी अर्जित सम्मान भी चले जाते…..।
इन्ही सब परेशानियों के बीच एक और परेशानी आई….. झरना का इकलौता पुत्र कोरोना की चपेट में आ गया….. काफी गंभीर स्थिति में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया ….पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से वह अपने बच्चे को बचा नहीं पाई….।
आज सारी दौलत शोहरत रखी की रखी रह गई …..वो भी उसके बच्चे को बचा न सके…..इस घटना से झरना काफी आहत हुई…..
कहीं ना कहीं झरना अपने इस दुखद घटना को ….उस कृत्य से जोड़कर देख रही थी….
उसे बार-बार लग रहा था… हर मनुष्य को अपने कर्म की सजा इसी जन्म में भुगतना होता है ….शायद मैंने पौधारोपण में भ्रष्टाचार कर नाइंसाफी की…. शायद इसीलिए मेरे बच्चे की ऑक्सीजन की कमी के कारण मृत्यु हो गई………और अनबोलते पशु का सहारा लेकर इस कृत्य को अंजाम दिया….
इसी वजह से मुझे इतने दुख झेलने पड़े…..।
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ओह…. मुझ जैसा ” भाग्यहीन ” और कोई नहीं…..धन दौलत संपत्ति सब कुछ होते हुए भी अपने बच्चें को बचा न सकी ….शायद किसी ने सच ही कहा है… पैसा बहुत कुछ तो है पर सब कुछ नहीं…!
माफ करना मेरे लाल….लाख कोशिश के बाद भी मैं तुझे बचा न सकी…. एक बार फिर झरना ने अपने बेटे को याद कर तड़प उठी…।
इस दर्दनाक घटना के बाद झरना ने जिंदगी भर… कभी बेईमानी भ्रष्टाचार ना करने की शपथ ली….।
और हां ….आज भी झरना… कभी गौ माता (गाय) को कहीं भी देखती है …तो मन ही मन पश्चाताप के साथ क्षमा याचना जरूर करती हैं…… एक अनबोलते पशु का नाम लेकर बेईमानी (भ्रष्टाचार) को अंजाम जो दिया था….
झरना की आपबीती बातें अन्य अधिकारी बड़े ध्यान से सुन रहे थे… अंत में झरना ने इतना अवश्य कहा… आप सब याद रखिएगा… हम आपसे झूठ बोल सकते हैं आप हमसे….. पर ऊपरवाला हम दोनों को देख रहा होता है….।
और हां…. एक बात और…. मैं कितना भी अपने जमीर …अपना उदाहरण देकर आप को समझाऊँ… पर जब तक आप खुद में इसके लिए तैयार नहीं होंगे ….कोई कुछ नहीं कर सकता ……ईमानदारी हो या अन्य कोई भी चीज….किसी के कहने से नहीं बदलती…उसके अंदर खुद से बदलाव आनी चाहिए…. जब वो खुद को बदलना या सुधारना चाहेगा …तभी संभव होगा …..और मैं नहीं चाहती …मेरे समान कुछ हादसा होने के बाद आप लोगों को सद्बुद्धि आए….।
आज मेरा बेटा 18 बरस का हो चुका होता ……कहते कहते झरना मैडम की आंखों में आंसू थे…..।
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित और अप्रकाशित रचना )
साप्ताहिक विषय : #भाग्यहीन
संध्या त्रिपाठी