छोटी बहन – नीलम गुप्ता : Moral Stories in Hindi

कभी कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा भी करना पड़ता

है____________

अनुपमा उर्फ़ अनु, मेरी छोटी बहन बहुत प्यारी है l मेरा हर कहा मानती है l

अपने चार साल छोटी अनु पर मैं खूब रॉब चलाती हूँ – अनु एक गिलास पानी

देना l अनु मेरे बेग में से हिन्दी की किताब निकाल कर ला l मेरे कपडे में

अलमारी में रख दे ! वगैरह – वगैरह l वो मेरे किसी काम को मना नहीं करती l

मैं उसकी सफलता का नाजायज फायदा उठाती रही l परिणाम स्वरुप में

आलसी या स्पष्ट कहूँ तो कामचोर होती गई l घर के काम में ही अनु ही माँ का

हाथ बटाती l समय बीतता गया l अनु दसवीं कक्षा में आ गई थी l बोर्ड की

परीक्षा थी l उस पर पढाई का काफी बोझ था l मेरे कॉलेज में छुट्टियाँ थी l में

आराम से बैठकर उपन्यास पढ़ रही थी l तभी अनु स्कूल से वापिस आई l मेरे

सिर में दर्द है, में थोड़ी देर आराम करना चाहती हूँ – कहकर वह कमरे में जाकर

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लेट गई l मैंने माँ से चाय बनवाकर पी ली l शाम हो गई थी l मैंने अनु को

जगाया – जा, बाज़ार से दही ले आ और सुन, मेरे लिए एक नोटबुक और दो

नीले पैन भी ले आना ! मेरी तबियत ठीक नहीं है दीदी ! कहकर वो फिर लेट

गई l मैंने उसका माथा छुकर देखा, बुखार तो नहीं है l सर में बहुत दर्द हो रहा

है दीदी, जरा सर दवा दो l में उसका सर दवाने लगी l मीनू ! जरा थर्मामीटर

लगाकर तो देख ! माँ ने कहा l बुखार नहीं है माँ ! मैंने थर्मामीटर का पारा चेक

करते हुए बताया l ठीक है, अभी इसे आराम करने दो और तुम मेरे साथ रसोई

के काम में हाथ बटाओ – कहती हुई माँ रसोई में चली गई l में भी अनमानी सी

उनके पीछे चल दी l

अगले दिन सुबह पापा अनु को डाक्टर के पास लेकर गएl डाक्टर साहब I कल

दोपर से इसके सिर में बहुत दर्द है, हाथ पैरो में और कमर में भी दर्द हैl पापा ने

डाक्टर को बतायाl डाक्टर अंकल ने अनु का गला चेक किया l आंखें देखी,

स्टैथौस्कोप लगा कर जाँच की और पर्चे पर दवा लिख दी l यह दवा तीन दिन

दे, ठीक हो जाएँगी l दवा लेकर वे घर आ गए l अनु आते ही बिस्तर में घुस गई

l मेने उसके लिए दूध गर्म किया साथ में उसके मन पसंद ओरियो बिस्कुट

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खिलाये l फिर उसे दवाई दी l माँ को अनु की चिंता हो रही थी l आप परेशान

ना हो माँ ! में उसका ध्यान रखूंगी l में उसको समय पे दवाई देती l कभी उसका

सिर दबाती, कभी कमर l थैंक्यू दीदी ! आप मेरी कितनी सेवा कर रही हो –

अनु कहती l अब तेरी तबियत खराब है तो में तेरा ख्याल नहीं रखूँगी तो कौन

रखेगा ? मेने कहा तो अनु मेरी अच्छी दीदी ! कहकर मेरे गले से लिपट गई l

परंतु तीन दिन बाद भी अनु की तबीयत ठीक नहीं हुई तो डाक्टर ने कुछ

‘ब्लड टेस्ट’ करवाने को कहा l सारी रिपोर्टस नॉर्मल थी l लगता है पढ़ाई

के दबाब के कारण ऐसा हो रहा है – डाक्टर ने कहा l चिंता की कोई बात

नहीं है l अभी इसे कुछ दिन आराम करने दे और ये टोनिक देते रहे l इसके खाने

पीने का भी ध्यान रखे l हल्का, पौष्टिक खाना खिलाएं साथ ही दूध, दही, फल

देते रहे l पन्द्रह दिन बाद दिखाएं l इस बीच कोई परेशानी हो तो मुझसे संपर्क

करें l उस दिन मैं ही अनु को क्लिनिक ले कर गई थी l मैंने सारी हिदायतें नोट

कर ली l घर आते ही मैंने अनु के लिए सेब काटकर दिया, फिर उसके लिए

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खिचड़ी बनाई l आधे घंटे बाद टॉनिक पिलाया l इतनी भागदौड़ मैं बहुत थक

गई थी l फिर भी मैंने उसे खाना खिलाया और दूसरा टॉनिक दिया l उसने

पढ़ाई करना शुरू कर दिया था पर अभी स्कूल नहीं जा रही थी l मैं कॉलेज जाने

से पहले अनु को नाश्ता, टॉनिक वगैरह दे कर जाती l वापस आकर उसके लिए

फल काटती , कभी दूध गरम देती तो काभी टॉनिक पिलाती l रात को उसका

मनपसंद खाना बनाती कभी भरवाँ इडली, कभी सूप कभी वेजिटेबल पुलाव !

अनु स्कूल जाने लगी थी l मैंने चैन की साँस ली l आज डाक्टर के पास जाना था l

अनु ! जल्दी तैयार हो जाओ डाक्टर के पास चलना है -मैंने कहा तो अनु बोली

ठीक है दीदी , मैं अभी तैयार होकर आती हूँ पर हम डाक्टर के पास नहीं,

शापिंग करने चलेंगे – यह कहकर वह खिलखिला कर हँस दी l मैं हैरानी से उसे

देखती रह गई जब उसने खुलासा किया कि उसकी तबीयत खराब थी ही नहीं !

उसने तो मुझसे सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा किया था l

 

नीलम गुप्ता

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