कभी कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा भी करना पड़ता
है____________
अनुपमा उर्फ़ अनु, मेरी छोटी बहन बहुत प्यारी है l मेरा हर कहा मानती है l
अपने चार साल छोटी अनु पर मैं खूब रॉब चलाती हूँ – अनु एक गिलास पानी
देना l अनु मेरे बेग में से हिन्दी की किताब निकाल कर ला l मेरे कपडे में
अलमारी में रख दे ! वगैरह – वगैरह l वो मेरे किसी काम को मना नहीं करती l
मैं उसकी सफलता का नाजायज फायदा उठाती रही l परिणाम स्वरुप में
आलसी या स्पष्ट कहूँ तो कामचोर होती गई l घर के काम में ही अनु ही माँ का
हाथ बटाती l समय बीतता गया l अनु दसवीं कक्षा में आ गई थी l बोर्ड की
परीक्षा थी l उस पर पढाई का काफी बोझ था l मेरे कॉलेज में छुट्टियाँ थी l में
आराम से बैठकर उपन्यास पढ़ रही थी l तभी अनु स्कूल से वापिस आई l मेरे
सिर में दर्द है, में थोड़ी देर आराम करना चाहती हूँ – कहकर वह कमरे में जाकर
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लेट गई l मैंने माँ से चाय बनवाकर पी ली l शाम हो गई थी l मैंने अनु को
जगाया – जा, बाज़ार से दही ले आ और सुन, मेरे लिए एक नोटबुक और दो
नीले पैन भी ले आना ! मेरी तबियत ठीक नहीं है दीदी ! कहकर वो फिर लेट
गई l मैंने उसका माथा छुकर देखा, बुखार तो नहीं है l सर में बहुत दर्द हो रहा
है दीदी, जरा सर दवा दो l में उसका सर दवाने लगी l मीनू ! जरा थर्मामीटर
लगाकर तो देख ! माँ ने कहा l बुखार नहीं है माँ ! मैंने थर्मामीटर का पारा चेक
करते हुए बताया l ठीक है, अभी इसे आराम करने दो और तुम मेरे साथ रसोई
के काम में हाथ बटाओ – कहती हुई माँ रसोई में चली गई l में भी अनमानी सी
उनके पीछे चल दी l
अगले दिन सुबह पापा अनु को डाक्टर के पास लेकर गएl डाक्टर साहब I कल
दोपर से इसके सिर में बहुत दर्द है, हाथ पैरो में और कमर में भी दर्द हैl पापा ने
डाक्टर को बतायाl डाक्टर अंकल ने अनु का गला चेक किया l आंखें देखी,
स्टैथौस्कोप लगा कर जाँच की और पर्चे पर दवा लिख दी l यह दवा तीन दिन
दे, ठीक हो जाएँगी l दवा लेकर वे घर आ गए l अनु आते ही बिस्तर में घुस गई
l मेने उसके लिए दूध गर्म किया साथ में उसके मन पसंद ओरियो बिस्कुट
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खिलाये l फिर उसे दवाई दी l माँ को अनु की चिंता हो रही थी l आप परेशान
ना हो माँ ! में उसका ध्यान रखूंगी l में उसको समय पे दवाई देती l कभी उसका
सिर दबाती, कभी कमर l थैंक्यू दीदी ! आप मेरी कितनी सेवा कर रही हो –
अनु कहती l अब तेरी तबियत खराब है तो में तेरा ख्याल नहीं रखूँगी तो कौन
रखेगा ? मेने कहा तो अनु मेरी अच्छी दीदी ! कहकर मेरे गले से लिपट गई l
परंतु तीन दिन बाद भी अनु की तबीयत ठीक नहीं हुई तो डाक्टर ने कुछ
‘ब्लड टेस्ट’ करवाने को कहा l सारी रिपोर्टस नॉर्मल थी l लगता है पढ़ाई
के दबाब के कारण ऐसा हो रहा है – डाक्टर ने कहा l चिंता की कोई बात
नहीं है l अभी इसे कुछ दिन आराम करने दे और ये टोनिक देते रहे l इसके खाने
पीने का भी ध्यान रखे l हल्का, पौष्टिक खाना खिलाएं साथ ही दूध, दही, फल
देते रहे l पन्द्रह दिन बाद दिखाएं l इस बीच कोई परेशानी हो तो मुझसे संपर्क
करें l उस दिन मैं ही अनु को क्लिनिक ले कर गई थी l मैंने सारी हिदायतें नोट
कर ली l घर आते ही मैंने अनु के लिए सेब काटकर दिया, फिर उसके लिए
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खिचड़ी बनाई l आधे घंटे बाद टॉनिक पिलाया l इतनी भागदौड़ मैं बहुत थक
गई थी l फिर भी मैंने उसे खाना खिलाया और दूसरा टॉनिक दिया l उसने
पढ़ाई करना शुरू कर दिया था पर अभी स्कूल नहीं जा रही थी l मैं कॉलेज जाने
से पहले अनु को नाश्ता, टॉनिक वगैरह दे कर जाती l वापस आकर उसके लिए
फल काटती , कभी दूध गरम देती तो काभी टॉनिक पिलाती l रात को उसका
मनपसंद खाना बनाती कभी भरवाँ इडली, कभी सूप कभी वेजिटेबल पुलाव !
अनु स्कूल जाने लगी थी l मैंने चैन की साँस ली l आज डाक्टर के पास जाना था l
अनु ! जल्दी तैयार हो जाओ डाक्टर के पास चलना है -मैंने कहा तो अनु बोली
ठीक है दीदी , मैं अभी तैयार होकर आती हूँ पर हम डाक्टर के पास नहीं,
शापिंग करने चलेंगे – यह कहकर वह खिलखिला कर हँस दी l मैं हैरानी से उसे
देखती रह गई जब उसने खुलासा किया कि उसकी तबीयत खराब थी ही नहीं !
उसने तो मुझसे सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा किया था l
नीलम गुप्ता