Post View 578 आखिर उमा थी तो इंसान ही.मानवीय कमजोरियाँ कभी-कभार उसपर हावी हो ही जातीं.नहीं चाहने पर भी अनगिनत ख्यालें और यादें उसका पीछा नहीं छोड़ती. उसके अंतर्मन की यादें परत-दर-परत अनायास ही खुलने लगीं और अंतस की भीतरी तहों में दबी अतीत की यादें उसके सामने एक-एककर जीवंत हो उठीं.यादें उसके मन में … Continue reading त्याग – डाॅ संजु झा
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