सौतेलेपन का दंश -कुमुद मोहन : hindi kahaniya
hindi kahaniya : “अरी ओ महारानी!उठकर चाय बनाओगी या दिन भर किताबों में घुसी रहोगी?तुम्हारी मां तो भाग गई अपने यार के साथ मेरी छाती पे मूंग दलने को तुझे छोड़ गई,अपने साथ ही ले जाती तो मेरी जान छूटती!अरे मैं भी कितनी मूरख हूं तुझे क्यों भला साथ ले जाती,उसकी अय्याशियों में कांटा ना … Read more