सोने का हार
अपने मां-बाप की इकलौती बेटी शालिनी बचपन से होनहार थी। जैसे ही थोड़ी बड़ी हुई वह अपने से छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी और अपने पढ़ाई का खर्चा अपने ट्यूशन के पैसे से निकाल लेती थी। उसके पापा की गांव में ही किराने की दुकान थी। वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती थी … Read more