मेरा फैसला (कहानी) – अंतरा 

एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे पंचायत लगी थीI  पूरा गांव इकट्ठा हुआ था। सब आपस में  खुसर फुसुर कर रहे थे। कोई मुंह छुपा कर हंस रहा था तो कोई  व्यंग्य कर रहा था …किसी के चेहरे पर मायूसी और दया थी तो किसी के चेहरे पर क्रोध  कुंठा और चिंता के … Read more

भरोसा – रश्मि स्थापक

उस सर्द शाम को धुंधलका कुछ जल्द ही हो चला था। ट्रेन अपनी गति से भाग रही थी और नील का मन भी उतनी ही तेजी से भाग रहा था। रह रह कर उसे निशा का मासूम सा चेहरा दिखता। कभी मुस्कुराता हुआ कभी हंसता हुआ और कभी बिल्कुल उदास। धड़कते दिल से रामगढ़ आने … Read more

उफ्फ बुआ जी की नादानियां ( भाग-1) – सुल्ताना खातून 

हमारे खानदान मे हमारी बुआ जी के नादानियों के किस्से बड़े मशहूर हैं,,, दरअसल वो हमारी चच्ची की बुआ हैं मतलब उनके अब्बा की बहन…. बात बहुत पुरानी है… जाहिर सी बात ही अब बुआ जी पुरानी हैं तो उनके किस्से भी पुराने ही होंगे…. हालांकि बुआ जी पुरानी हैं पर लगती नहीं हैं देखने … Read more

अतीत के झरोखे से – अंशु श्री सक्सेना

हमारे ज़माने में शादी ब्याह वाले घरों में प्रेम सम्बन्धों की पौध बिना खाद-पानी के ही पनप जाया करती थी। मतलब आजकल प्रचलित टिंडर या बम्बल जैसे डेटिंग ऐप्स जैसा रुतबा इन शादी-ब्याह वाले घरों का हुआ करता था। आज मुझे ऐसी ही एक मासूम सी कहानी याद आ गई तो सोचा आज इस कहानी … Read more

किसी के घर सोच समझ कर खाओ –  मधु वशिष्ट

आशा जी हमारी कॉलोनी के सबसे ज्यादा चुस्त-दुरुस्त और मिलनसार महिला है। मुझे तो इस कॉलोनी में आए हुए केवल 6 महीने हो गए हैं। 4 महीने पहले पड़ोस की मीना भाभी ने  मुझे सोसाइटी की किट्टी में भी ज्वाइन करवा दिया था। किट्टी ज्वाइन करने से पहले भी मीना भाभी मुझे एक बार आशा … Read more

प्रेम विवाह – अंतरा

प्रेम विवाह में बंधी औरत उस नवजात पिल्ले (puppy) की तरह होती है  जिसे कोई बच्चा मोहपाश में बंधकर अपने घर उठा लाता है लेकिन उसके मां-बाप उसे स्वीकार नहीं कर पाते हैं…  कहां से लाए हो… किसका है… हम अपने घर में नहीं रख पाएंगे..  जहां से लेकर आए हो वहीं छोड़ आओ…. हम … Read more

मॉर्डन होना कपड़ों से नहीं विचारों से होता हैं… – संगीता त्रिपाठी

ऑफिस जाते समय राघव ने रीना से कहा -अगले हफ्ते  गोवा में मेरा चार दिन का सेमीनार हैं ,दो दिन वीकेंड के मिल जायेंगे तो पूरा हफ्ता गोवा में मस्ती ,तुम लोग चलने की तैयारी कर लो। हुर्रे.. तनु और मयंक दोनों उछल पड़े पापा आप ग्रेट हो…।रीना मुस्कुरा कर बोली -ये दल बदलू बच्चे … Read more

बुढ़ापे से बड़ी बीमारी नहीं। – स्मिता सिंह चौहान

“तू कुछ कहता क्यों नहीं?बहुत दिन हो गये अब तो,इतने दिन कौन रहता है?अपनी बेटी के ससुराल में।हमारे गले में तो लड़की के घर का पानी भी नही जाता,समधन जी तो ऐसे बैठी है जैसे अब जायेंगी नहीं।”वीना जी ने अपने बेटे सुशील से बोली। “कैसी बात करती हो मां?अब उनकी तबियत नहीं ठीक है … Read more

भरोसा अपनों का – सुभद्रा प्रसाद 

रात के बारह बज रहे थे | आभा अपने कमरे की खिड़की के पास चुपचाप खड़ी थी |आसमान में तारे चमक रहे थे |बाहर वातावरण एकदम शांत था, पर आभा का मन बेहद अशांत था | उसे अपना घर, अपने माँ -पापा बेहद याद आ रहे थे |उसका तन तो स्थिर था पर मन तेजी … Read more

दीदी इतना दिखावा कैसे कर लेती हो – शीनम सिंह

“बस इतना ही सामान लाई है बहु??” “ये क्या बस गिनती के 4 गहने??” “कम से कम कपड़े ही ढंग के दे देते” “माफ़ करना भाभी हमें तो कुछ भी अच्छा नहीं लगा।इतना सुंदर है हमारा अमित ऊपर से सरकारी नौकरी भी है कोई अच्छा घर देख कर शादी करते… लगता है लड़की बिल्कुल गरीब … Read more

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