नजरिया – डॉ उर्मिला सिन्हा

Post View 1,552   मन खिन्न था … धीरे-धीरे बड़े होते हुए बेटा बेटी .. उनकी चाहतें,जिद, उटपटांग  हरकतें उन्हें परेशान कर  डालती है।   “पराठा , पूड़ी सब्जी ,खीर,सेव‌ई कोई खाने की वस्तु है….”नाश्ते के प्लेट को हाथ नहीं लगाते आज के  बच्चे।     भले कालेज के कैंटीन में पिज्जा,बर्गर, फास्ट फूड, अगड़म -बगड़म खाकर अपनी भूख … Continue reading नजरिया – डॉ उर्मिला सिन्हा