किसके नाम की मांग – प्रेम बजाज
Post View 5,998 रामलाल रोज़मर्रा की मजदूरी करने वाला। कभी काम मिल जाता और कभी नहीं। सारा दिन काम की तलाश में घूम-फिर कर घर वापस आ बैठता। घर पर आकर वही किट-किट। ” अजीत सुनते हो, ना दाल है ना चावल। छबीली को क्या बना के खिलाऊं? उधर मुन्नी भी भूख से बिलख रही … Continue reading किसके नाम की मांग – प्रेम बजाज
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