जीवन की शाम – नीरजा कृष्णा

Post View 748 मीता सुबह चाय लेकर आई…जगत बाबू आँखों पर बाँह फैलाऐ चुपचाप लेटे थे…आँखें नम थीं…वो चिंतित होकर पुकार बैठी,”पापा चाय…क्या बात है…अभी तक लेटे हैं…आप तो बहुत जल्दी उठ जाते हैं।” वो चौंक कर उठ बैठे और नज़रें चुराते हुए चाय का कप थाम लिया… वो वहीं कुर्सी खींच कर बैठ गई,” … Continue reading जीवन की शाम – नीरजा कृष्णा