दर्द समझने वाली बहू !- मीनू झा
Post View 3,937 “तुम्हारा तो ये रोज का है” कोई कितना एडजस्ट करेगा रोहित…तुम जैसे पहले अपनी सारी डेली रूटीन फ़ॉलो कर रहे थे वैसे अभी भी कर रहे हो क्या ये सही है?? अरे मम्मी पापा आएं हैं तुम्हारे,उनके प्रति भी तुम्हारा कोई फर्ज बनता है कि नहीं.. उन्हें समय देना बनता है ना … Continue reading दर्द समझने वाली बहू !- मीनू झा
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