दर्द की पराकाष्ठा – शकुंतला अग्रवाल ‘शकुन’
Post View 436 पावस ऋतु ढलान पर थी शरद की दस्तक से हवा में नमी व्याप्त होने लगी थी। मंद-मंद पवन का झौंका भाव-विभोर कर जाता है। उस पर पूनम की रात हो तो समस्त वसुधा प्रेममयी हो जाती है। ऐसे सुरम्य-वातावरण में भी किसी के अंतस में लावा फूट रहा हो तो, प्रकृति भी … Continue reading दर्द की पराकाष्ठा – शकुंतला अग्रवाल ‘शकुन’
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