कुंभ- स्नान – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

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  ” जानकी जी, महाकुंभ खत्म होने में अब तो कुछ ही दिन रह गये हैं..आप चलेंगी ना..हम टिकट करवा ले…।” शांति जी अपनी पड़ोसिन से पूछने लगी तो जानकी जी बोलीं,” नहीं शांति बहन..हम नहीं जा सकेंगे..आप और सुलोचना बहन चले जाईये..।” ” पिछले कई महीनों से तो आप ही रट लगाये हुए थी..फिर अब … Read more

फ़र्ज़ – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

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       ” प्रकाश..कुछ दिनों में मैं तुम्हारे रुपये लौटा दूँगा..बहन की शादी आ पड़ी है।बचाये हुए रुपये बेटे की बीमारी में खर्च हो गये वरना मैं तुमसे कभी नहीं…।”   ” लौटाने की बात नहीं है भाई..सच में इस वक्त इतनी बड़ी रकम मेरे पास नहीं है..बिजनेस में भी घाटा हो रहा है तो…।” मित्र दिनेश की … Read more

होते है कुछ दोस्त ऐसे – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

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निकेतन कई दिनों से परेशान था उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे वो अपनी बीमार माँ और पत्नी से अपनी परेशानी शेयर करे… कभी कभी तो उसके दिमाग में बुरे विचार भी आने लगते… नाते रिश्तेदारों ने भी अपने हालात का हवाला देकर पहले ही हाथ खींच लिए थे ऐसे में वो ज़िन्दगी से … Read more

वक्त पर काम आना – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

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मानव और मनमीत दोनो एक ही गांव से थे दोनो ही गरीब परिवारों के थे मनमीत मानव से सात साल बड़ा था जो कि शहर में छोटी मोटी नौकरी कर रहा था और मनमीत नौकरी की तलाश में था कुछ जगह धक्के खाने के बाद उसने विदेश जाने का मन बनाया गांव की सोसाइटी में … Read more

वक्त पर काम आना – खुशी : Moral Stories in Hindi

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निधि और आरती पड़ोसन थी।निधि बहुत दिखावा करती थीं हमेशा आरती को कहती मै तुम्हारी बहन हू तब मुझे बुलाना और हर समय आरती के घर में ही खाती पीती रहती कही भी घूमने जाती तो अपने बच्चें भी उसी के भरोसे छोड़ जाती। आरती के पड़ोस में ही गायत्री भी रहती थी जो घर … Read more

वक्त पर काम आना – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

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रेखा:   जानते हो रवि…? कल हमारी पड़ोसन एक नई साड़ी पहनकर रमा जी के यहां पूजा में आई थी… वह अपने पति का बखान करते थक नहीं रही थी… कह रही थी वह साड़ी 18000 की है… यह कहकर वह इतना इतरा रही थी कि क्या ही बोलूं? कल अगर आप साथ होते तो, … Read more

अरमान निकालना – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 47

रुचि ने अपने पति रोहित से पूछा  ,रोहित  मां पापा  का बहुत मन है , कुंभ जाने का ,मै ले के चली जाऊ क्या? आप  दो दिन मम्मी जी और पापा जी ,ध्यान रख लेते तो ठीक था । रोहित ने बोला पागल तो नहीं हो गई? किसी और के साथ भेज दो , उनका … Read more

मदद – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

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तू बिल्कुल नहीं समझता  अक्लू , इतना रात तक कहां भटक रहा था ?  आप काहे नहीं सोए बाबूजी  मैं थोड़ा काम से गया था ।   मैं सोने ही वाला था ,कि तुम्हारी दादी खाँसने लगी ,उसे ही पानी देने गया ,तो तू नदारद था। तेरा लंगोटिया रघु के साथ घूमता होगा है, न?  … Read more

विपत्ति में अपने पराये की पहचान – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

New Project 55

भाभी का फोन सुनते ही भावना एक बार तो चक्कर खा गिरते बची । उसकी आंँखों में आँसू बहने लगे । स्मृति पटल पर बीते दिन घूमने लगे। कितना फर्क पड़ गया इन तीन वर्षों में उसकी शादी के एक वर्ष के अन्दर रेल दुर्घटना में माता पिता का स्वर्गवास उसके बाद उनकी बरसी पर … Read more

वृद्ध आश्रम – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

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मिसिस एन्ड मि. राहुल गुप्ता का इकलौता बेटा रोहन, पढ़ लिख कर यू एस में जॉब करता था। पिछले 5 साल में 2 बार भारत आया था। पहली बार अपनी शादी करवाने और दूसरी बार अब, पिताजी के गुजरने पर। पिताजी के जाने के बाद, मॉ एकदम अकेली हो गई थी, इसलिए रोहन चाहता था … Read more

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