टका सा मुँह लेकर रह जाना – डॉ ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 59

    “क्या मम्मी! भाभी की दो साड़ियाँ ही तो ली हैं मैंने। भाभी को तो शादी में ससुराल और मायके दोनों ही तरफ़ से इतनी साड़ियाँ मिली है। अगर मैं दो-तीन साड़ियाँ ले भी लूँगी तो क्या ही फ़र्क पड़ जाएगा। आखिर यह मेरा मायका है, मेरा हक़ है।” तृषा ने तुनक कर कहा जो कि … Read more

दहन – डॉ ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 35

    “बहू! मीता!” कमरे में बैठी मीता की सास दमयंती ने मीता को पुकारा।         “जी! आ रही हूँ, मम्मी।” साड़ी का आँचल कमर में खोंसती मीता ने रसोईघर से उत्तर दिया।          “आकर क्या करेगी? ग्यारह बज रहे हैं। अभी तक होली- पूजन के पकवान नहीं बने। बताओ तो ज़रा, कब होली पूजने जाएँगे हम? मुझे तो … Read more

” मुझ से शादी करोगी?” – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

New Project 41

बचपन का साथी सुहास जब भी पूछता, स्वाति मना कर देती। धीरे धीरे बडे हो गये वे। उसने स्वाति से प्यार-भरे अंदाज में पुछा, ” मेरी प्रिया बनोगी?” वह चुप रही। पता नहीं उसके मन क्या था। वह क्या चाहती थी? अपनी पढाई, करिअर बनाने व्यस्त पता ही नहीं चला, सुहास कब उससे दूर चला … Read more

खिचड़ी का मेलजोल – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

New Project 46

बैंड-बाजे के शोर में सुमिता जब ससुराल पहुँची, तो दरवाज़े पर उसकी अगवानी के लिए पूरा परिवार खड़ा था। आरती का थाल, फूलों की वर्षा, ढोल-नगाड़े… और सासू माँ का भावुक बयान— “अब ये घर तेरा ही है, बेटी!” लेकिन सुमिता को जल्दी ही समझ आ गया कि ‘तेरा ही है’ का असली मतलब यह … Read more

पैरों की धूल समझना – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

New Project 2024 04 29T104516.742

रीता और रमन की शादी को पंद्रह साल हो गये थे । रीता की शिक्षा हिंदी मीडियम से हुई थी । जिस कारण उसको  अंग्रेजी बोलने में असुविधा होती थी । लेकिन हिंदी में उसकी पकड़ बहुत अच्छी थी ।रमन  रीता को” अपने पैरों की धूल समझता” था ।  बात बात पे गवार शब्द का … Read more

पैरों की धूल समझना – हेमलता श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

New Project 78

राहुल पिछले काफी टाइम से उदास और परेशान रहने लगा था मां ने एक दिन पूछा भी की क्या बात है बेटा तबीयत नहीं ठीक है? ऑफिस में कोई परेशानी है? नहीं मां ऐसी कोई बात नहीं है,  राहुल हर बार मना कर देता था कि नहीं कोई परेशानी नहीं है वह कैसे किसी को … Read more

किस्मत – मोनिका रघुवंशी : Moral Stories in Hindi

New Project 46

हैलो मैं मोहन कुमार बोल रहा हूँ क्या श्यामा चरण जी से बात हो सकती है। दूल्हे के पिता का नाम सुनते ही दुल्हन के मामा श्यामाचरण जी फोन की ओर लपके हां हां समधी जी बोलिये न मैं… उमा का मां ही बोल रहा हूँ। वो क्या है न समधी जी… कैसे बताऊं मेरा … Read more

नुकसान – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

New Project 84

भगवान भला करें बिटिया भोलेनाथ के नाम पर इस झोली में कुछ डाल दो मैं वक्त की मारी दुखिया हूं… सड़क के किनारे बस का इंतजार करती रुचि और उसकी सहेली मीनल के सामने अचानक एक कमजोर महिला आ गई। शर्म करो हाथ पांव सलामत है फिर भी यूं सड़क पर खड़े होकर हाथ फैला … Read more

वक्त पर काम आना – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

moral story in hindi

मानसी को लोग देखकर यहां वहां भाग जाते थे लोग सोचते थे कि यह आएगी और बताने लगेगी की हमें कैसे रहना चाहिए क्या करना चाहिए क्योंकि मानसी एनजीओ में काम करती थी और दिनभर उसे कई लोगों को समझाना पड़ता था कि हमें अच्छे से रहना चाहिए और हमें पढ़ लिखकर अच्छे संस्कार रखना … Read more

कुंभ- स्नान – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 99

  ” जानकी जी, महाकुंभ खत्म होने में अब तो कुछ ही दिन रह गये हैं..आप चलेंगी ना..हम टिकट करवा ले…।” शांति जी अपनी पड़ोसिन से पूछने लगी तो जानकी जी बोलीं,” नहीं शांति बहन..हम नहीं जा सकेंगे..आप और सुलोचना बहन चले जाईये..।” ” पिछले कई महीनों से तो आप ही रट लगाये हुए थी..फिर अब … Read more

error: Content is Copyright protected !!