मंगला मुखी (भाग-8) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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कदम्ब और वीथिका के मन में एक झिझक और डर था – ” तुम भी साथ चलो मौसी। हम लोग कैसे इतने बड़े डॉक्टर के यहॉ जायेंगे, कहीं बात सुनने के पहले ही अपमान करके भगा दिया तो।” ” अगर भगा देंगे तो क्या हुआ? तुमसे कुछ छीन तो लेंगे नहीं लेकिन अगर मान गये … Read more

मंगला मुखी (भाग-7) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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वीथिका फूट फूटकर रोने लगी तो रेशमा ने आगे बढ़कर उसे अपने गले लगा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुये चुप कराया। फिर वैदेही को गोद में लेकर उसको आशीर्वाद देते हुये कहा – ” जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। जब सब रास्ते बंद हो जाते हैं तो वह कोई … Read more

मंगला मुखी (भाग-6) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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एक बार गई तो पता चला कि उसके पापा का वहॉ से स्थानान्तरण हो गया है। उसके बाद उसे कभी पता नहीं चला कि उसका परिवार कहॉ चला गया और उसने भी दिल पर पत्थर रखकर कभी उन्हें ढूंढने का प्रयास नहीं किया। क्या करती, वह तो पहले ही उस परिवार से डाली से टूटे … Read more

मंगला मुखी (भाग-5) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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वीथिका उठकर अन्दर गई और एक गिलास में पानी ले आई।  रेशमा को देते हुये उसने कहा – ” अगर मेरी किसी बात से आपका दिल दुखा हो तो मुझे क्षमा कर दीजिये।” ” नहीं, तुम माफी मत मॉगो, तुम्हारी कोई गलती नहीं है। यह हमारी नियति है जिसे भोगना ही हमारा प्रारब्ध है।” फिर … Read more

मंगला मुखी (भाग-4) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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और सचमुच जब से कदम्ब और वीथिका ने बच्चे का जन्म शहर में करवाने का अपना निर्णय अम्मा को बताया तो अम्मा – बाबू दोनों बहुत नाराज हो गये – ” तुम तो ऐसे कह रहे हो मुन्ना जैसे गांव में सारी औरतें बच्चे पैदा करने में मर ही जाती हैं। कुछ नहीं होगा। तुम … Read more

मंगला मुखी (भाग-3) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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जब भी विनय गुप्ता कनाडा से भारत आकर अपने बंगले में रहते , कदम्ब उन्हीं के बंगले में रहता और उन्हीं के साथ खाना खाता।  जब वह  जाने लगते तो उसे दस हजार रुपये के साथ खूब सारे कपड़े आदि दे जाते। ग्रेजुएशन करने के बाद कदम्ब के बहुत प्रयत्न करने पर भी नौकरी नहीं … Read more

मंगला मुखी (भाग-2) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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बहुत मिन्नत के बाद आखिर रेशमा मान गई और खुशी के कारण फूट फूटकर रोने लगी – ” कल एक बार जाऊंगी सबसे विदा लेने। आखिर उस समाज ने मुझे आसरा और सहारा दिया है। उन्हें भी बताऊंगी कि कोई है जो मुझसे नफरत नहीं करता है बल्कि मुझे प्यार और सम्मान देता है। अब … Read more

मंगला मुखी (भाग-1) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

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दोस्तों आप सबको बहुत बहुत प्यार और अभिवादन। आज मैं आप सबके समक्ष एक नई कहानी लेकर आई हूॅ। आशा है कि आप सबका प्यार, आशीर्वाद और सहयोग मेरी इस कहानी को भी मिलेगा। साथ ही आप सबकी उत्साह वर्धक प्रतिक्रियायों की प्रतीक्षा रहेगी ताकि मैं उत्साह पूर्वक आगे बढ़ सकूॅ। साथ ही आप सबको … Read more

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