इन दीवारों के कान नहीं हैं – रवीन्द्र कान्त त्यागी   : Moral stories in hindi

New Project 86

लाहौल विला कुव्वत. अरे बेगम, ये गुसलखाने में उबलता पानी क्यों रख दिया. मुझे नहलाना है या पकाना है. अरे सुनती हो, नलके से थोड़ा ठंडा पानी लाकर मिला दो. हमने कपडे उतार दिए हैं. बहार नहीं आ सकते. खलील मियां बाथरूम से चिल्लाये. “अरे कहाँ मर गईं नसीमन की खला. यहाँ हम ठण्ड से … Read more

इधर की उधर करना – संगीता अग्रवाल  : Moral stories in hindi

New Project 13

” तुम्हे पता है शालिनी कल संध्या और उसके पति में झगड़ा हो रहा था !” मीना अपनी एक पड़ोसन से दूसरी पड़ोसन के बारे में बात करती हुई बोली। ” अच्छा वो तो परफेक्ट कपल है जो कभी नहीं लड़ते …वैसे तुम्हे कैसे पता जबकि मैं भी उन्ही के पड़ोस में रहती हूं पर … Read more

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